बिलासपुर:– इंदू इंटरप्राईजेस के तहत बिल्हा क्षेत्र में रेलवे कार्य कर रहे मध्यप्रदेश के लगभग 40 श्रमिकों ने अपनी बकाया मजदूरी को लेकर जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। श्रमिकों का आरोप है कि ठेकेदार हरीश खन्ना द्वारा 5,54,550 रुपये की मजदूरी का भुगतान अब तक नहीं किया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सभी श्रमिक जिला उमरिया (मध्यप्रदेश) के निवासी हैं और बिल्हा, बिलासपुर (छत्तीसगढ़) में रेलवे से जुड़े कार्य में करीब 45 दिनों तक कार्यरत रहे। मजदूरों के मुताबिक कुल 1306 हाजिरी दर्ज की गई, जिसमें 740 बेलदार और 565 रेजा की हाजिरी शामिल है। बेलदार की दैनिक मजदूरी 600 रुपये और रेजा की 550 रुपये तय थी। इस आधार पर कुल देय राशि 7,54,550 रुपये बनती है।

श्रमिकों का कहना है कि उन्हें अब तक केवल 2,00,000 रुपये का आंशिक भुगतान किया गया है, जबकि 5,54,550 रुपये बकाया है। मजदूरों का आरोप है कि भुगतान की मांग करने पर ठेकेदार द्वारा टालमटोल किया जा रहा है और कथित रूप से यह भी कहा गया कि “जहां शिकायत करना है कर दो।”
मजदूरी नहीं मिलने से श्रमिकों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। परिवार और बच्चों के पालन-पोषण में कठिनाई हो रही है। बाहरी राज्य के निवासी होने के कारण छत्तीसगढ़ में उनका कोई स्थायी सहारा नहीं है, जिससे वे खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं।
श्रमिकों ने जिला कलेक्टर बिलासपुर से हस्तक्षेप कर बकाया राशि दिलाने की मांग की है। साथ ही मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन और दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के डीआरएम को भी लिखित शिकायत भेजी गई है।

ठेकेदार का पक्ष
वहीं ठेकेदार हरीश खन्ना ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने श्री सुशील कुमार लोकीहा को प्रशिक्षित श्रमिक लगाने के निर्देश दिए थे, लेकिन उनकी ओर से अनट्रेंड लेबर से कार्य कराया गया। खन्ना के अनुसार, उन्होंने न तो किसी प्रकार की गाली-गलौज की और न ही जानबूझकर भुगतान रोका।
उनका कहना है कि सुशील कुमार लोकीहा अपने बड़े भाई के दुर्घटना में घायल होने और अस्पताल में भर्ती होने की बात कहकर साइट छोड़कर चले गए थे और 4–5 दिन बाद हिसाब करने की बात कही थी। इसके बाद से वे संपर्क में नहीं हैं और फोन कॉल का जवाब भी नहीं दे रहे हैं।

अब सवाल यह है कि प्रशासन इस मामले में कितनी तत्परता दिखाता है और मजदूरों को उनका बकाया भुगतान कब तक मिल पाता है।













