नई दिल्ली : इस साल होली 25 मार्च को मनाई जा रही है। हालांकि भारत की कई जगहों पर होली उत्सव रंगभरी एकादशी के बाद से ही शुरु हो जाता है। वहीं होली के एक दिन पहले होलिका दहन होता है और उसके बाद लोग रंग खेलते हैं। इसके साथ ही होली के पांचवे दिन रंगभरी पंचमी मनाई जाती है। इस दिन भी लोग अबीर गुलाल से होली खेलते हैं। तरह-तरह के पकवान बनते हैं और मिलकर होली की शुभकामना देते हैं। यह दिन देवी देवताओं को समर्पित किया जाता है। आइए जानते हैं रंगपंचमी क्यों मनाई जाती है, कैसे मनाई जाती है और इस दिन का महत्व क्या है।
कब है रंग पंचमी 2024:
हिंदू कैलेंडर के मुताबिक, तिथि से कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को होली मनाते हैं और पांच दिन बार चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की पंचमी को रंग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस बार रंग पंचमी 30 मार्च, शनिवार को मनाई जा रही है। रंग पंचमी को कृष्ण पंचमी भी कहते हैं। इसके अलावा रंग पंचमी को श्रीपंचमी या देव पंचमी भी कहा जाता है।
रंग पंचमी कैसे मनाई जाती है?
रंग पंचमी का पर्व महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान में विशेष तौर पर धूमधाम से मनाते हैं। मान्यताओं के मुताबिक रंग पंचमी का पर्व भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी से जुड़ा हुआ है। ऐसे में इस दिन श्री कृष्ण और राधा रानी की पूजा की जाती है। इस दौरान कान्हा और राधा जी को रंग अर्पित किया जाता है। कई स्थानों पर इस दिन जुलूस निकाला जाता है और अबीर गुलाल उड़ाया जाता है।
रंग पंचमी का धार्मिक महत्व
कहा जाता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण राधा रानी के साथ होली खेला करते थे। उनके साथ ही देवी देवता आसमान से फूलों की वर्षा करते। धार्मिक महत्व के मुताबिक, रंग पंचमी के दिन रंगों के प्रयोग से सृष्टि में सकारात्मक ऊर्जा का संवहन होता है। इसी सकारात्मक ऊर्जा में लोगों को देवताओं के स्पर्श की अनुभूति होती है।
रंग पंचमी पर हवा में अबीर-गुलाल उड़ाने का महत्व
रंग पंचमी के दिन हवा में अबीर-गुलाल उड़ाते है। मान्यता है कि पंचमी तिथि पर रंगों के उत्सव से दैवीय शक्ति का असर ज्यादा होता है जिससे नकारात्मक ऊर्जाओं का प्रभाव बहुत ही कम हो जाता है। रंग पंचमी पर उड़ाए गए अलग-अलग रंगों से इकट्ठा हुए शक्ति के कण अनिष्ट शक्ति से लड़ते हैं। जिस कारण से मनुष्य के जीवन में दैवीय शक्तियों का प्रभाव बन रहता है और जीवन में हमेशा सकारात्मक ऊर्जा रहती है।






