नई दिल्ली : देश में कई किसानों को धान की खेती कराने में काफी लागत आती है। आज के समय जिस रफ्तार से मजदूरी महंगी हो रही है वह भी धान की रोपाई कराते समय लागत काफी बढ़ा देती है। धान की खेती करने के लिए नर्सरी तैयार करना, रोपाई करना, आदि चीजें शामिल हैं। इनमें खर्चा काफी अधिक आता है। इतनी मेहनत करने के बाद किसानों को धान की फसल बेचने के बाद मुनाफा काफी कम होता है। वहीं क्या आपको इस बारे में पता है कि आप धान की खेती सीधी बुवाई विधि से करके अच्छी खासी पैसों की बचत कर सकते हैं। DSR विधि से धान की खेती करने से कम खर्चे में आपको ज्यादा मुनाफा मिलेगा। इसके अलावा आप इससे कम पानी में अच्छी खासी उपज भी तैयार कर सकेंगे। इसी कड़ी में आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से –
डीएसआर विधी में नर्सरी तैयार या प्रतिरोपण करने की जरूरत नहीं होती है। इसमें धान के बीजों को रोपाई से 20 से 30 दिन पहले ही बोया जाता है। लेजर लेवलर का उपयोग करके खेती की सिंचाई करने के बाद बीज ड्रिल या लकी सीडर मशीन की मदद से बीजों को बोया जाता है।
इस दौरान बीजों का खास ध्यान रखना होता है। बुवाई के 21 दिनों के बाद पहली सिंचाई की जाती है। इसके बाद 7-10 दिन के अंतराल पर 14-17 और राउंड किए जाते हैं, जो कि मानसून की बारिश और मिट्टी की गुणवत्ता के आधार पर निर्भर करता है। वहीं कटाई से 10 दिन पहले अंतिम सिंचाई की जाती है।
डीएसआर विधी से खेती करने के फायदे
इस विधि से खेती करने पर आपकी मेहनत की काफी बचत होती है।
फसल की बुवाई कम समय में होती है।
फसल 7 से 10 दिन पहले तैयार हो जाती है।
जुताई और बुवाई का कम खर्च आता है।
डीएसआर विधि से खेती करने में जल की खपत कम होती है।
इस विधि से खेती करने में ईंधन की भी कम खपत होती है।













