नई दिल्ली: भारत सरकार बैंकों के निजीकरण के तहत आईडीबीआई बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने जा रही है. मीडिया रिपोर्ट में सरकारी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि आईडीबीआई बैंक के विनिवेश की प्रक्रिया मार्च 2025 तक पूरी हो जाएगी. अधिकारियों ने बताया कि सरकार ने अगले वित्त वर्ष की पहली छमाही तक आईडीबीआई ट्रांजैक्शन को पूरा करने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए सरकार जल्द ही बोली आमंत्रित कर सकती है.एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार ने आईडीबीआई बैंक के विनिवेश प्रक्रिया में डेटा रूम से जुड़ी सभी समस्याओं को दूर कर दिया है. इससे लेन-देन के अगले चरण का रास्ता साफ हो गया है. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि IDBI बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया सुचारू रूप से आगे बढ़ रही है. डेटा रूम से जुड़ी सभी समस्याओं का समाधान कर लिया गया है और जल्द ही वित्तीय बोलियां आमंत्रित की जाएंगी.
आईडीबीआई बैंक का निजीकरण (File Photo)डेटा रूम की चिंताओं का समाधानरिपोर्ट के मुताबिक, बोली लगाने वाली संभावित कंपियों को बैंक के वित्तीय डेटा तक पहुंच की अनुमति दी गई है, जिससे उन्हें मूल्यांकन निर्धारित करने और बोली राशि को अंतिम रूप देने में मदद मिलेगी. रिपोर्ट में कहा गया है कि डेटा रूम की चिंताओं का समाधान यह संकेत देता है कि बैंक के लिए बोली लगाने प्रक्रिया अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है.61 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की योजनाIDBI बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया जनवरी 2023 में शुरू हुई थी, जब केंद्र सरकार ने रुचि पत्र (Expression of Interest) जारी किया था. सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने संयुक्त रूप से आईडीबीआई बैंक में 61 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की योजना बनाई है, जिसमें सरकार की 30.48 प्रतिशत और एलआईसी की 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है.सरकार ने केंद्रीय बजट 2025-26 में विनिवेश और परिसंपत्ति मुद्रीकरण से 47,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है.













