श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर सरकार ने प्राइवेट अस्पतालों को सरकार की प्रमुख मुफ्त स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत आने वाले चार सर्जिकल प्रक्रियाओं की पेशकश करने पर रोक लगा दी है. अब इसे केवल सरकारी अस्पतालों तक ही सीमित कर दिया गया है.जिन चार सर्जरी पर रोक लगाई गई है उनमें, कोलेसिस्टेक्टोमी (पित्ताशय की थैली को हटाना), हेमरॉएडेक्टोमी (बवासीर), स्फिंक्टेरोटॉमी (फिशर) और एपेंडेक्टोमी (अपेंडिक्स) शामिल हैं. जम्मू-कश्मीर राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य लाभ पैकेजों में ये महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिसका असर नए प्राइवेट अस्पतालों पर पड़ रहा है.राज्य सरकार के इस निर्णय के बाद अब ये प्रक्रियाएं 15 मार्च से लाभार्थियों को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) या ‘गोल्डन कार्ड’ योजना के तहत केवल सार्वजनिक अस्पतालों में ही उपलब्ध कराई जाएंगी.
यह योजना केंद्र शासित प्रदेश में 86 लाख से अधिक लोगों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये का कैशलेस स्वास्थ्य कवर प्रदान करती है.एक आधिकारिक आदेश में कहा गया है कि, राज्य स्वास्थ्य एजेंसी की 8वीं और 9वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुसरण में, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के सभी सूचीबद्ध सार्वजनिक और निजी अस्पतालों में स्वास्थ्य लाभ पैकेज (HBP) 2.2 में महत्वपूर्ण बदलाव लागू करने का निर्णय लिया गया है.अब तक, कुछ सर्जिकल प्रक्रियाएं क्षेत्र के निजी अस्पतालों में की जाने वाली कुल सर्जरी का बड़ा हिस्सा थीं. पिछले साल, निजी अस्पतालों के आंकड़ों के अनुसार, उन्होंने 1,14000 सर्जरी कीं, जिनमें से 65 प्रतिशत पित्ताशय की थैली, बवासीर और अपेंडिसाइटिस जैसी सर्जरी थीं.
इसके अलावा, निजी अस्पतालों के लिए मूल्य पैकेज में भी संशोधन किया गया है और अब से उन्हें 10 प्रतिशत अतिरिक्त मूल्य नहीं दिया जाएगा.लाभार्थियों को चिकित्सा और शल्य चिकित्सा उपचार प्रदान करने के लिए 250 से अधिक अस्पतालों को इस योजना के लिए सूचीबद्ध किया गया है. कई निजी अस्पतालों को इस योजना के तहत फर्जी और धोखाधड़ी वाले बिल पेश करके 11.8 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोप में केंद्र सरकार द्वारा कार्रवाई का सामना करना पड़ा है.दूसरी ओर, चार प्रक्रियाओं को हटाने से सरकारी अस्पतालों में मरीजों के लिए वेटिंग पीरियड बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है. सरकारी डॉक्टरों ने इस कदम की सराहना करते हुए तर्क दिया कि इस योजना का वित्तीय लाभ के लिए दुरुपयोग किया जा रहा है.श्रीनगर में सरकारी मेडिकल कॉलेज और एसोसिएटेड अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने माना कि अस्पतालों में मरीजों की संख्या अस्थायी रूप से बढ़ सकती है, लेकिन उनका मानना है कि समय के साथ यह स्थिर हो जाएगी.
सरकारी डॉक्टरों का कहना है कि, ये चार बुनियादी सर्जरी बड़े पैमाने पर इस योजना के तहत निजी अस्पतालों में की जा रही थीं, जिससे स्नातकोत्तर मेडिकल छात्र प्रभावित हो रहे थे. इस बदलाव से सरकार की मुफ्त बीमा योजना के दुरुपयोग को रोकते हुए नैदानिक प्रशिक्षण में सुधार कर सकते हैं. हालांकि, इस योजना के तहत निजी अस्पतालों में सर्जरी करने वाले एक अन्य डॉक्टर ने कहा कि इस योजना का केवल 10 प्रतिशत लोगों ने ‘दुरुपयोग’ किया है, जबकि इससे आर्थिक स्थिति से परे लोगों को अपनी पसंद के स्थान पर इलाज कराने में काफी लाभ होगा.इस पर निजी अस्पतालों के एक प्रवक्ता ने कहा कि, चार सर्जिकल प्रक्रियाओं को बाहर करने से मरीजों को गुणवत्तापूर्ण देखभाल प्रदान करने की उनकी क्षमता कम हो जाती है. दावा किया जा रहा है कि, इससे लगभग 10 हजार लोगों को नौकरी देने और नए फैसले के कारण उन्हें कर्मचारियों को हटाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा और इस तरह बेरोजगारी बढ़ेगी. बताया गया है कि, जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव द्वारा पिछले साल दिसंबर तक बकाया चुकाने के आश्वासन के बावजूद सरकार के पास 350 करोड़ रुपये लंबित हैं।













