क्या आपको पता है पान में क्यों मिलाया जाता है चुना, कत्था और कसैली? एक्सपर्ट से जान लें इसके फायदे…
नई दिल्ली:- दशहरा, दीवाली और शादियों में पान खाना शुभ माना जाता है. पान से लाल हुए होंठ और सफेद कुर्ते पर पड़े लाल छींटे एक अलग ही रंगत देते हैं. पान का महत्व इस कदर है कि मेहंदी उतारने से पहले चुने का पानी लगा दिया जाए तो मेहंदी का रंग गाढ़ा हो जाता है. आज हम मगही पान अनुसंधान केंद्र इस्लामपुर के वैज्ञानिक डॉ. प्रभात कुमार से जानेंगे कि पान में चुने, कत्थे और सुपारी का क्या महत्व है. डॉक्टर प्रभात कुमार ने बताया कि पान के पत्ते पर कई जगह अनुसंधान किए गए हैं, जिनसे पता चला है कि पान के साथ तंबाकू का सेवन नहीं करना चाहिए.
तंबाकू से माउथ अल्सर और कैंसर की समस्या होती है, जिससे पान भी बदनाम हो गया है. लेकिन पान में कुछ ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी को दूर करने में कारगर हैं. इस पर हमारे वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं और एंटी कार्सिनोजेनिक तत्वों की खोज कर रहे हैं, जो कैंसर को दूर करने में सहायक होते हैं.
पान संग कत्था, सुपारी और चुना खाने के फायदे
डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि पान पर कत्था, सुपारी और चुना लगाने से इसमें पाए जाने वाले एसिडिक नेचर को न्यूट्रलाइज किया जा सकता है. पान के साथ चुना लगाने से शरीर में कैल्शियम की कमी पूरी होती है. पान के साथ चुना लगाकर खाना काफी फायदेमंद हो सकता है, लेकिन ध्यान रखें कि सुपारी पर किसी प्रकार का फफूंद न लगा हो. इसके लिए ज्यादा भींगा हुआ सुपारी कभी न खाएं. हमेशा सूखा हुआ सुपारी का उपयोग करें, ताकि फफूंद से बच सकें। सुपारी में पाया जाने वाला फफूंद कई बार कैंसर का कारण बन सकता है.
2018 में मगही पान को मिला GI टैग
डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि मगध क्षेत्र में मगही पान काफी प्रसिद्ध है. इस कारण भारत सरकार ने इसे भौगोलिक पहचान दी है और GI टैग मिला हुआ है. GI टैग मिलने से यहां के लोगों का पान देश ही नहीं, विदेशों तक पहुंच रहा है. इससे उन किसानों को भी फायदा हो रहा है, जो इसकी खेती कर रहे हैं. 2018 में मगही पान को GI टैग का दर्जा मिला था. पान का महत्व सिर्फ खाने और औषधीय प्रयोजन में ही नहीं, बल्कि इसका धार्मिक और सांस्कृतिक उपयोग भी हो रहा है. इस कारण यहां के व्यवसायियों को मार्केट में एक अलग पहचान मिल रही है.
नई दिल्ली:- दशहरा, दीवाली और शादियों में पान खाना शुभ माना जाता है. पान से लाल हुए होंठ और सफेद कुर्ते पर पड़े लाल छींटे एक अलग ही रंगत देते हैं. पान का महत्व इस कदर है कि मेहंदी उतारने से पहले चुने का पानी लगा दिया जाए तो मेहंदी का रंग गाढ़ा हो जाता है. आज हम मगही पान अनुसंधान केंद्र इस्लामपुर के वैज्ञानिक डॉ. प्रभात कुमार से जानेंगे कि पान में चुने, कत्थे और सुपारी का क्या महत्व है. डॉक्टर प्रभात कुमार ने बताया कि पान के पत्ते पर कई जगह अनुसंधान किए गए हैं, जिनसे पता चला है कि पान के साथ तंबाकू का सेवन नहीं करना चाहिए.
तंबाकू से माउथ अल्सर और कैंसर की समस्या होती है, जिससे पान भी बदनाम हो गया है. लेकिन पान में कुछ ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी को दूर करने में कारगर हैं. इस पर हमारे वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं और एंटी कार्सिनोजेनिक तत्वों की खोज कर रहे हैं, जो कैंसर को दूर करने में सहायक होते हैं.
पान संग कत्था, सुपारी और चुना खाने के फायदे
डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि पान पर कत्था, सुपारी और चुना लगाने से इसमें पाए जाने वाले एसिडिक नेचर को न्यूट्रलाइज किया जा सकता है. पान के साथ चुना लगाने से शरीर में कैल्शियम की कमी पूरी होती है. पान के साथ चुना लगाकर खाना काफी फायदेमंद हो सकता है, लेकिन ध्यान रखें कि सुपारी पर किसी प्रकार का फफूंद न लगा हो. इसके लिए ज्यादा भींगा हुआ सुपारी कभी न खाएं. हमेशा सूखा हुआ सुपारी का उपयोग करें, ताकि फफूंद से बच सकें। सुपारी में पाया जाने वाला फफूंद कई बार कैंसर का कारण बन सकता है.
2018 में मगही पान को मिला GI टैग
डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि मगध क्षेत्र में मगही पान काफी प्रसिद्ध है. इस कारण भारत सरकार ने इसे भौगोलिक पहचान दी है और GI टैग मिला हुआ है. GI टैग मिलने से यहां के लोगों का पान देश ही नहीं, विदेशों तक पहुंच रहा है. इससे उन किसानों को भी फायदा हो रहा है, जो इसकी खेती कर रहे हैं. 2018 में मगही पान को GI टैग का दर्जा मिला था. पान का महत्व सिर्फ खाने और औषधीय प्रयोजन में ही नहीं, बल्कि इसका धार्मिक और सांस्कृतिक उपयोग भी हो रहा है. इस कारण यहां के व्यवसायियों को मार्केट में एक अलग पहचान मिल रही है.













