नई दिल्ली :– 15 फरवरी यानी आज देशभर में महाशिवरात्रि का पावन पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को यह पर्व आता है। मान्यता है कि इसी दिव्य रात्रि में भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। साल भर में 12 शिवरात्रि होती हैं, लेकिन महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है। भक्त आज व्रत रखकर, रात्रि जागरण कर और चारों प्रहर में शिव पूजन कर भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
चार प्रहर पूजन में प्रथम प्रहर शाम 6:11 से रात 9:23 बजे तक, द्वितीय प्रहर 9:23 से 16 फरवरी की रात 12:35 बजे तक, तृतीय प्रहर 12:35 से सुबह 3:47 बजे तक और चतुर्थ प्रहर 3:47 से सुबह 6:59 बजे तक रहेगा। निशीथ काल, जो शिव पूजन के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है, 16 फरवरी रात 12:09 से 1:01 बजे तक रहेगा। जलाभिषेक के लिए आज कई शुभ समय प्राप्त हो रहे हैं, जिनमें सुबह 8:24 से 9:48, 9:48 से 11:11, 11:11 से 12:35 (अमृत सर्वोत्तम मुहूर्त) और शाम 6:11 से 7:47 बजे तक विशेष फलदायी माने गए हैं।
इस बार महाशिवरात्रि पर व्यतीपात और सर्वार्थ सिद्धि योग सहित कई शुभ योग बन रहे हैं। साथ ही सूर्य, बुध और शुक्र की युति से बुधादित्य और लक्ष्मी नारायण जैसे राजयोग भी बन रहे हैं, जो इस दिन के महत्व को और बढ़ा रहे हैं। पूजा विधि के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर व्रत का संकल्प लें, शिवलिंग पर जल, दूध या गंगाजल से अभिषेक करें, बेलपत्र, धतूरा अर्पित करें और ‘ऊं नमः शिवाय’ का जाप करें। महामृत्युंजय मंत्र और रुद्र गायत्री मंत्र का जाप भी अत्यंत फलदायी माना गया है। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई छोटी-सी भक्ति भी भोलेनाथ को प्रसन्न कर देती है।












