नई दिल्ली:– महाराष्ट्र की राजनीति में आरक्षण को लेकर एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राज्य की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने मुस्लिम समुदाय को शिक्षा के क्षेत्र में मिलने वाले 5% आरक्षण को औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया है। सरकार द्वारा जारी नए शासन निर्णय (GR) के अनुसार, 2014 से चली आ रही इस आरक्षण प्रक्रिया पर अब पूर्ण विराम लगा दिया गया है।
अब नहीं मिलेगा शैक्षणिक लाभ
नए आदेश के लागू होने के बाद, अब राज्य के कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में मुस्लिम श्रेणी के विद्यार्थियों को 5% आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि, इस श्रेणी के तहत अब कोई नया जाति प्रमाण पत्र या वैधता प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जाएगा। पूर्व में जारी किए गए सभी आदेश और परिपत्र (Circulars) तत्काल प्रभाव से अमान्य घोषित कर दिए गए हैं। किसी भी संस्थान में इस कोटे के तहत नए प्रवेश नहीं दिए जाएंगे और न ही कोई लंबित प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
यह आरक्षण मूल रूप से 2014 में एक अध्यादेश (Ordinance) के माध्यम से लाया गया था। हालांकि, समय पर कानून न बन पाने और उच्च न्यायालय की रोक के कारण यह लंबे समय से कानूनी अनिश्चितता में फंसा हुआ था। अब सरकार ने जीआर जारी कर इस अध्याय को पूरी तरह बंद कर दिया है।
विपक्ष का हमला
इस फैसले पर AIMIM सांसद इम्तियाज जलील ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इसे ‘रमजान का तोहफा’ करार देते हुए कहा, “हाईकोर्ट ने भी माना था कि मुसलमानों में शिक्षा छोड़ने की दर (Drop-out rate) सबसे अधिक है, इसके बावजूद आरक्षण खत्म किया गया। हम अपने युवाओं से कहेंगे कि वे शिक्षा न छोड़ें, पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया।”
उप सचिव का तबादला
आरक्षण खत्म करने के साथ ही राज्य के अल्पसंख्यक विभाग में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल भी हुआ है। विभाग के उप सचिव मिलिंद शेनॉय का तबादला कर दिया गया है।
विवाद का कारण
आरोप है कि 28 जनवरी से 2 फरवरी 2026 के बीच, रिकॉर्ड समय में 75 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जा दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ फाइलों पर डिजिटल हस्ताक्षर उस समय के दर्ज हैं जब पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद राज्य में शोक की अवधि चल रही थी।
सीएम फडणवीस ने बिठाई जांच
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन सभी 75 मंजूरियों पर तत्काल रोक लगा दी है। इसमें पोदार इंटरनेशनल के 25 स्कूलों सहित कई बड़े संस्थान शामिल हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं












