रायपुर।
राजधानी रायपुर में इन दिनों पर्यावरण की स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है।

उरला, धरसींवा और आसपास के गांवों के साथ-साथ अब शहर के कई हिस्सों में काले धुएं का गुबार छाया हुआ दिखाई दे रहा है। बढ़ते प्रदूषण के बावजूद पर्यावरण विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्रों में कई छोटी कंपनियां कम ऊंचाई की चिमनियां लगाकर खुले तौर पर धुआं छोड़ रही हैं, जिससे हवा की गुणवत्ता तेजी से खराब हो रही है।

इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग की ओर से ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। हालात यह हैं कि पर्यावरण विभाग के कार्यालय परिसर में भी धूल की परत जमी दिखाई देती है, जबकि अधिकारी बंद कमरों में बैठकर औपचारिक कार्यवाही तक सीमित नजर आते हैं।

आम नागरिकों का आरोप है कि विभाग की सुस्ती के कारण राजधानी के लोगों को स्वच्छ हवा के बजाय धूल और प्रदूषण का सामना करना पड़ रहा है।

लगातार बिगड़ती पर्यावरणीय स्थिति अब लोगों की दिनचर्या और स्वास्थ्य पर भी असर डालने लगी है।

इसी मुद्दे को लेकर हाल ही में कांग्रेस कमेटी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पर्यावरण विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया था और प्रदूषण नियंत्रण के लिए एक माह का अल्टीमेटम भी दिया था। हालांकि अब तक हालात में कोई खास सुधार नहीं दिखाई दे रहा है।

वहीं आम जनता के बीच यह सवाल भी उठने लगा है कि आखिर किन मंत्री या विधायक के संरक्षण में पर्यावरण विभाग के अधिकारी इतनी मनमानी कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि हालात इतने गंभीर हैं, तो फिर जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही।

न तो किसी अधिकारी का निलंबन हो रहा है और न ही ट्रांसफर जैसी कार्रवाई देखने को मिल रही है।

मीडिया के सवालों से भी कई अधिकारी कन्नी काटते नजर आते हैं और कई बार जिम्मेदारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों पर डालते दिखाई देते हैं।

ऐसे में राजधानी की बिगड़ती हवा और बढ़ते प्रदूषण को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और प्रशासन से जल्द ठोस कदम उठाने की मांग की जा रही है।














