छत्तीसगढ़:– जिस हाथ ने दशकों तक ब्लैकबोर्ड पर भविष्य की इबारत लिखी, आज वही हाथ अपनी नौकरी बचाने के लिए कलम और किताब पकड़ने को मजबूर हैं। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़, दोनों राज्यों में शिक्षा का परिदृश्य एक गहरे संकट के मुहाने पर खड़ा है। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट का ‘पात्रता’ वाला कड़ा आदेश है, तो दूसरी तरफ 30 साल की सेवा का वह अनुभव, जो अब कागज के एक प्रमाणपत्र (TET) के सामने बौना साबित हो रहा है।
सुप्रीम कोर्ट की ‘अग्निपरीक्षा’ और लटकती तलवार
सुप्रीम कोर्ट ने एक सितंबर 2025 को अपने ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट कर दिया कि चाहे स्कूल सरकारी हो या निजी, प्राथमिक और माध्यमिक कक्षाओं को पढ़ाने वाले हर शिक्षक को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। अदालत ने इसके लिए 1 सितंबर 2025 की समय-सीमा तय की थी। इस आदेश ने एमपी के करीब 1.5 लाख और छत्तीसगढ़ के लगभग 75 हजार शिक्षकों की रातों की नींद उड़ा दी है।
छत्तीसगढ़: ’92 प्रतिशत फेल’ और दिल्ली तक गूंज
छत्तीसगढ़ में हालात और भी गंभीर हैं। हाल ही में 1 फरवरी 2026 को आयोजित टीईटी के नतीजों ने सबको चौंका दिया।
निराशाजनक परिणाम: बिना टीईटी योग्यता वाले लगभग 80 हजार शिक्षकों में से मात्र 8 प्रतिशत ही सफल हो सके। शेष 92 फीसदी शिक्षकों की कुर्सी अब खतरे में है।
रामलीला मैदान में हुंकार: अपनी मांगों को लेकर दो दिन पहले ही छत्तीसगढ़ के ‘अनक्वालीफाइड’ शिक्षकों ने दिल्ली के रामलीला मैदान में विशाल प्रदर्शन किया। उनकी मांग है कि पाठ्यक्रम को सरल बनाया जाए या एक ‘सीमित विभागीय परीक्षा’ ली जाए।
मध्य प्रदेश: 30 साल की सेवा बनाम अनुच्छेद 21
एमपी के शिक्षक संगठनों ने इस आदेश को ‘मानवीय अधिकारों’ का हनन बताया है।
तर्क और विरोध: संगठनों का कहना है कि जब 1995 से 2010 के बीच उनकी नियुक्तियां हुईं, तब टीईटी का कोई प्रावधान ही नहीं था। अब 30 साल बाद जब वे रिटायरमेंट के करीब हैं, उनसे परीक्षा लेना अनुच्छेद 14 (समानता) और अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का उल्लंघन है।
क्या है रास्ता? सरकारें और संगठन आमने-सामने
दोनों ही राज्यों की सरकारें फिलहाल ‘बीच का रास्ता’ निकालने की कोशिश में जुटी हैं।
एमपी सरकार: स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने भरोसा दिया है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दाखिल करेगी।
छत्तीसगढ़ सरकार: शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने ‘गुणवत्ता’ पर जोर देते हुए समस्या के समाधान पर विचार करने की बात कही है।













