नई दिल्ली:–:अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपने चार दिवसीय भारत दौरे के दौरान शनिवार को नई दिल्ली स्थित सेवा तीर्थ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। विदेश मंत्री बनने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा है। हालांकि इससे पहले वह अमेरिकी सीनेटर और संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के सदस्य के तौर पर भी भारत आ चुके हैं। करीब एक घंटे चली इस बैठक में दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत बनाने से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।
रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी पर रहा जोर
भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ा है। इसी कड़ी में रुबियो की यह यात्रा काफी अहम मानी जा रही है। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने व्यापार, निवेश, उभरती तकनीकों और आपसी सहयोग को नई दिशा देने पर विचार-विमर्श किया। साथ ही लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने और विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी को और गहरा करने पर भी चर्चा हुई।
जयशंकर के साथ होगी विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता
कोलकाता दौरा पूरा करने के बाद शनिवार को दिल्ली पहुंचे रुबियो रविवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ विस्तृत द्विपक्षीय बैठक करेंगे। सूत्रों के अनुसार इस वार्ता में ऊर्जा सहयोग, व्यापारिक संबंध, तकनीकी भागीदारी और वैश्विक चुनौतियों पर विचार किया जाएगा। दोनों देशों के बीच बढ़ते कारोबारी संबंधों को देखते हुए निवेश और नई परियोजनाओं पर भी बातचीत की संभावना है।
क्वाड, रक्षा सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा पर फोकस
रुबियो के भारत दौरे में क्वाड समूह के तहत सहयोग, रक्षा साझेदारी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा प्रमुख एजेंडा रहने वाले हैं। इसके अलावा भारत द्वारा रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल की खरीद भी चर्चा का अहम विषय हो सकती है। अमेरिका भारत के ऊर्जा क्षेत्र में अपनी भागीदारी बढ़ाने का इच्छुक है और वह एलएनजी तथा कच्चे तेल के निर्यात को विस्तार देने के विकल्प तलाश रहा है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और ऊर्जा बाजार में बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच यह मुद्दा दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत पहुंचते ही जताया उत्साह
भारत पहुंचने के बाद मार्को रुबियो ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक संदेश साझा करते हुए अपनी यात्रा को लेकर उत्साह व्यक्त किया। उन्होंने लिखा, “भारत पहुंच गया हूं। शानदार दौरे का इंतजार है।” दौरे से पहले भी रुबियो ने कहा था कि अमेरिका भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। उनका मानना है कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन सकता है।










