मुख्यमंत्री श्री साय ने दुर्घटना संभावित क्षेत्रों और ब्लैक स्पॉट की पहचान कर वहां आवश्यक सुधारात्मक एवं सुरक्षात्मक उपाय प्राथमिकता से करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि वर्तमान में राज्य के 23 ब्लैक स्पॉट में सुधार की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। मुख्यमंत्री ने इन कार्यों को तेजी से पूरा करने तथा दुर्घटनाओं के कारणों का नियमित विश्लेषण कर आवश्यक सुधार सुनिश्चित करने को कहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क दुर्घटना होने के बाद शुरुआती समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। घायल व्यक्ति तक जितनी जल्दी सहायता और चिकित्सा सुविधा पहुंचेगी, जीवन बचाने की संभावना उतनी ही बढ़ेगी। उन्होंने दुर्घटना की सूचना, एम्बुलेंस की उपलब्धता, नजदीकी अस्पताल तक पहुंच और उपचार की पूरी व्यवस्था के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
दुर्घटना पीड़ितों की मदद के लिए आगे आएं नागरिक, योजनाओं का हो व्यापक प्रचार
मुख्यमंत्री श्री साय ने सड़क दुर्घटना पीड़ितों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पीएम-राहत योजना और राहवीर योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों तक यह संदेश प्रभावी रूप से पहुंचना चाहिए कि सड़क दुर्घटना देखकर घबराएं नहीं, बल्कि पीड़ित व्यक्ति की सहायता के लिए आगे आएं।
बैठक में बताया गया कि पीएम-राहत योजना के अंतर्गत पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों को दुर्घटना की तारीख से अधिकतम सात दिनों तक 1.50 लाख रुपए तक कैशलेस उपचार की सुविधा का प्रावधान है। वहीं राहवीर योजना सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की समय पर सहायता करने वाले नागरिकों की भागीदारी को प्रोत्साहित करती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन योजनाओं के संबंध में व्यापक जन-जागरूकता से सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर उपचार दिलाने में बड़ी मदद मिल सकती है।
दूरस्थ गांवों तक पहुंचे सार्वजनिक परिवहन, मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का होगा विस्तार
मुख्यमंत्री श्री साय ने मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना की समीक्षा करते हुए इसे और विस्तार देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे ग्रामीण, वनांचल और दूरस्थ क्षेत्रों को प्राथमिकता से चिन्हित किया जाए, जहां अभी नियमित सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक परिवहन केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बाजार जैसी आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच का महत्वपूर्ण आधार है। दूरस्थ गांव को बस सेवा से जोड़ने का अर्थ वहां के लोगों के लिए अनेक नए अवसरों के द्वार खोलना है। शासन का प्रयास होना चाहिए कि प्रदेश के अंतिम छोर पर रहने वाले व्यक्ति तक भी सुगम, सुरक्षित और सुलभ सार्वजनिक परिवहन सेवा पहुंचे।
बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के अंतर्गत वर्तमान में 13 जिलों के 106 मार्गों पर 107 बसों का संचालन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने परिवहन सुविधा से वंचित क्षेत्रों का सर्वे कर नए मार्गों की संभावनाओं का परीक्षण करने और आवश्यकता के अनुसार योजना का विस्तार करने के निर्देश दिए।
कोंटा-जगरगुंडा बस सेवा से दुर्गम क्षेत्र में आसान हुआ सफर
बैठक में दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के सकारात्मक प्रभावों की भी जानकारी दी गई। कोंटा से जगरगुंडा के बीच पहली बार प्रारंभ हुई बस सेवा से क्षेत्र के नागरिकों को आवागमन में बड़ी सुविधा मिली है।
बताया गया कि अंदरूनी और सुदूर क्षेत्रों से इस यात्रा में पहले लगभग छह घंटे तक का समय लग जाता था। बस सेवा प्रारंभ होने के बाद यही सफर लगभग 45 मिनट में पूरा हो रहा है। इससे स्थानीय लोगों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच आसान हुई है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी विकास की गति को तेज करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। जिन क्षेत्रों में वर्षों तक सार्वजनिक परिवहन सीमित रहा है, वहां नियमित बस सेवा आम नागरिकों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है।






