छत्तीसगढ़:- मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज प्रदेश की 14 लाख बहनें लखपति दीदी बन चुकी हैं। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ की महिलाओं की मेहनत, लगन, उद्यमशीलता और सामर्थ्य का प्रमाण है। स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं आज विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के माध्यम से न केवल अपने परिवार की आय बढ़ा रही हैं, बल्कि गांव और समाज की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के हाथों में आर्थिक सामर्थ्य आने से परिवारों में खुशहाली आती है, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य बेहतर होता है तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन की गति तेज होती है। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में हमारी मातृशक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार महिलाओं को स्वावलंबी बनाने, कौशल विकास, आजीविका और उद्यमिता के अधिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।
शक्ति आराधना की पावन भूमि है छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की पावन धरती है। यह मां दंतेश्वरी, मां बम्लेश्वरी, मां महामाया और मां चंद्रहासिनी जैसी आराध्य देवियों की भूमि है। प्रदेश में सदियों से शक्ति की उपासना और देवी आराधना की गौरवशाली परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि नवरात्रि के दौरान दंतेवाड़ा में मां दंतेश्वरी से लेकर डोंगरगढ़ में मां बम्लेश्वरी, रतनपुर में मां महामाया और चंद्रपुर में मां चंद्रहासिनी के दरबार तक श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। गांव-गांव और शहर-शहर में ज्योति कलश प्रज्ज्वलित होते हैं और पूरा छत्तीसगढ़ माता की भक्ति में सराबोर हो जाता है। यह हमारी गहरी धार्मिक आस्था के साथ प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की विशिष्ट पहचान है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति में प्रकृति, आस्था, लोकजीवन और अध्यात्म का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। हमारे तीज-त्योहार और धार्मिक परंपराएं पीढि़यों को आपस में जोड़ती हैं। इन्हें सहेजना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है।
‘विकास भी, विरासत भी’ के मंत्र के साथ आगे बढ़ रहा छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करते हुए आधुनिक विकास की नई ऊंचाइयों की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री जी ने देश को ‘विकास भी, विरासत भी’ का मंत्र दिया है। इसी भावना के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार भी प्रदेश के समग्र विकास के साथ अपनी संस्कृति, आस्था और परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। देवी शक्तिपीठों और आस्था केंद्रों में श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाओं के विकास के साथ उन्हें प्रदेश की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन से जोड़ने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सांस्कृतिक विरासत केवल अतीत की स्मृति नहीं है, बल्कि वर्तमान की शक्ति और भविष्य की प्रेरणा भी है। विकास की यात्रा में अपनी जड़ों और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़े रहना आवश्यक है। हमारी सरकार का प्रयास है कि आधुनिक और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के साथ प्रदेश की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान भी और अधिक सशक्त हो। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नवरात्रि और गरबा जैसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐसे आयोजन सामाजिक समरसता और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करते हैं तथा समाज में उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने मां दुर्गा से प्रार्थना करते हुए कहा कि माता रानी की कृपा सभी प्रदेशवासियों पर बनी रहे। हर घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आए तथा छत्तीसगढ़ शांति, समृद्धि और विकास के पथ पर निरंतर आगे बढ़ता रहे। इस अवसर पर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, श्री देवजी भाई पटेल, श्री जयंती पटेल, श्री जगदीश पटेल सहित विभिन्न समाजों के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।






