नई दिल्ली: फिलीपींस के विदेश सचिव एनरिक मनालो (Enrique Manalo) ने भारत और फिलीपींस के बीच एंटी-शिप ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों के लिए हुए समझौते को दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया.ब्रह्मोस मिसाइल समझौते पर बात करते हुए मनालो ने कहा, “यह हमारे रक्षा संबंधों में बड़ा महत्वपूर्ण विकास था और इससे न सिर्फ सैन्य उपकरणों के मामले में बल्कि सैन्य सहयोग, प्रशिक्षण, अधिकारियों के आदान-प्रदान और परिचालन सुविधाओं के मामले में आगे के सहयोग के लिए द्वार खुलेंगे.”भारत दौरे पर आए फिलीपींस के विदेश सचिव ने फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के सदस्यों के साथ बातचीत की, जहां उन्होंने रणनीतिक क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच बढ़ते जुड़ाव पर प्रकाश डाला.फिक्की के अध्यक्ष हर्षवर्धन अग्रवाल ने कहा, “जबकि हम व्यापार और निवेश के जरिये जुड़े हुए हैं, मुझे यह देखकर खुशी हो रही है कि यह जुड़ाव नए और रणनीतिक क्षेत्रों में विविधता ला रहा है.”
अग्रवाल ने अपशिष्ट प्रबंधन, ग्रीन मोबिलिटी (ऐसे परिवहन जो पर्यावरण के लिए कम हानिकारक हैं) और कृषि प्रौद्योगिकी को सहयोग के लिए आशाजनक क्षेत्रों के रूप में इंगित किया. साथ ही भारत द्वारा फिलीपींस को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की डिलीवरी को रक्षा साझेदारी के लिए अहम बताया.भारत ने पिछले साल अप्रैल में फिलीपींस को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें दीं, जो 2022 में दोनों देशों के बीच हुए 375 मिलियन अमेरिकी डॉलर के सौदे का हिस्सा थीं.रक्षा सूत्रों के अनुसार, भारतीय वायु सेना ने C-17 ग्लोबमास्टर विमान के जरिये फिलीपींस मरीन कॉर्प्स को मिसाइलें पहुंचाईं. मिसाइलों के साथ-साथ ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली के लिए जमीनी प्रणालियों का निर्यात पिछले महीने शुरू हुआ.
यह डिलीवरी ऐसे समय में हुई है जब दक्षिण चीन सागर में फिलीपींस और चीन के बीच तनाव बढ़ गया है. ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली की तीन बैटरियां फिलीपींस के तटीय क्षेत्रों में तैनात की जाएंगी, ताकि क्षेत्रीय खतरों के विरुद्ध फिलीपींस की रक्षा को मजबूत किया जा सके.इस सौदे को ब्रह्मोस कार्यक्रम में शामिल भागीदार देशों से कई मंजूरी मिली हैं. भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और रूस के NPO मशीनोस्ट्रोयेनिया के बीच संयुक्त उद्यम के तहत ब्रह्मोस का निर्माण किया जा रहा है, जिसे दुनिया की सबसे उन्नत मिसाइल प्रणालियों में से एक माना जाता है.ब्रह्मोस ने भारत की रक्षा क्षमताओं को काफी हद तक बढ़ाया है. 2007 से, भारतीय सेना ने अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करते हुए अपने शस्त्रागार में कई ब्रह्मोस रेजिमेंट को शामिल किया है.













