केंद्रीय मंत्रियों की बैठक में आज घोषणा की गई है कि भारत सरकार ने विशेष इस्पात उत्पादों की घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए नई पीएलआई (Production Linked Incentive) योजना स्कीम-1.2 शुरू की है। इस योजना के अंतर्गत पांच बड़े उत्पाद क्लस्टरों के लिए 22 उप-श्रेणियों को शामिल किया गया है, और कंपनियों को 4 % से लेकर 15 % तक की प्रोत्साहन दर दी जाएगी। इसके मुताबिक, योग्य कंपनियों को इन लाभों का लाभ अगले दस माह के भीतर ऑनलाइन आवेदन करने पर मिलेगा, और प्रोत्साहन की अवधि अगले पांच वर्ष (FY 26 से FY 30) तक घोषित की गई है। आधार वर्ष को FY 25 से अपडेट किया गया है ताकि वर्तमान इनपुट-लागत व बाज़ार की स्थिति को ध्यान में रखा जा सके। विश्लेषकों का कहना है कि इस कदम से भारत अपनी इस्पात-उद्योग को सिर्फ मात्रा में नहीं बल्कि गुणवत्ता व तकनीकी उन्नयन के दृष्टिकोण से भी आगे ले जाना चाहता है। देश के लिए यह एक रणनीतिक बदलाव है क्योंकि अब तक यह अपेक्षाकृत कम-मूल्य व पारंपरिक इस्पात उत्पादों पर निर्भर था।हालाँकि, इस योजना की चुनौतियाँ भी हैं — जैसे उत्पादन-लागत का बढ़ना, वैश्विक कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, और छोटे-मध्यम इस्पात उत्पादकों को लाभ उठाने का समान अवसर देना। यदि नियत आयु एवं उत्पादन-लक्ष्य पूरे नहीं हुए या वांछित तकनीकी मानक नहीं मिले, तो कंपनियों के लिए लाभप्राप्ति कम हो सकती है।













