कोरबा:–औद्योगिक नगरी कोरबा की राजनीति और विकास यात्रा में यदि किसी एक नाम की गूंज लगातार सुनाई देती है, तो वह है लखन लाल देवांगन। “लखन का काम दिखता है, लखन का काम बोलता है” यह सिर्फ़ एक नारा नहीं बल्कि उनकी कार्यशैली का सजीव प्रमाण बन चुका है। जन्मदिवस के अवसर पर यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि उन्होंने जनसेवा को केवल दायित्व नहीं, बल्कि जीवन का मूल उद्देश्य बना लिया है।
जमीनी नेतृत्व से शीर्ष तक का सफर
एक पार्षद के रूप में जनसेवा की शुरुआत कर महापौर और फिर छत्तीसगढ़ शासन में वाणिज्य, उद्योग एवं श्रम मंत्री के रूप में अपनी पहचान स्थापित करने वाले देवांगन का राजनीतिक सफर संघर्ष, समर्पण और निरंतर कर्मठता की मिसाल है। उनकी खासियत यह रही कि पद चाहे कोई भी रहा हो उन्होंने अपनी जड़ों से कभी दूरी नहीं बनाई। आम जनता के बीच सहज उपलब्धता और समस्याओं के त्वरित समाधान की उनकी शैली ने उन्हें “जन-जन का नेता” बना दिया है।
विकास को बनाया मूलमंत्र
कोरबा शहर में आज जिस व्यापक स्तर पर विकास कार्य दिखाई दे रहे हैं वह उनके विज़न और प्रतिबद्धता का परिणाम है। सड़कों का विस्तार आधारभूत संरचनाओं का सुदृढ़ीकरण, आधुनिक सुविधाओं का विस्तार हर क्षेत्र में एक साथ काम का जो पैमाना खड़ा हुआ है वह पहले कम ही देखने को मिला।
हर वार्ड, हर बस्ती, हर गली तक विकास की किरण पहुंचाने का उनका प्रयास स्पष्ट रूप से नजर आता है। यही कारण है कि जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता लगातार बढ़ी है।
24×7 जनसेवा का संकल्प
राजनीति में अक्सर समय और सीमाओं की चर्चा होती है, लेकिन देवांगन ने इस धारणा को तोड़ा है। 24 घंटे सातों दिन जनता के लिए उपलब्ध रहने की उनकी कार्यशैली उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाती है। चाहे किसी वार्ड की छोटी समस्या हो या औद्योगिक क्षेत्र से जुड़ा बड़ा मुद्दा हर विषय पर उनकी सक्रियता उल्लेखनीय रही है।
औद्योगिक विकास और श्रमिक हितों पर फोकस
प्रदेश के वाणिज्य, उद्योग एवं श्रम मंत्री के रूप में उन्होंने औद्योगिक विकास को नई दिशा देने के साथ-साथ श्रमिक वर्ग के हितों को भी प्राथमिकता दी है। उद्योगों के विस्तार के साथ रोजगार के नए अवसर सृजित करना और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना उनकी नीतियों का प्रमुख आधार रहा है। इससे कोरबा सहित पूरे छत्तीसगढ़ के औद्योगिक परिदृश्य को मजबूती मिली है।













