रायपुर:– प्रदेश में सड़कों की गुणवत्ता और निर्माण कार्यों में हो रही देरी को लेकर मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सड़क निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ताहीन काम बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि किसी भी परियोजना में कमी पाई गई तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई होगी और दोषी ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह निर्देश मंत्रालय Mahanadi Bhavan में आयोजित लोक निर्माण विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान दिए। बैठक में उपमुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री Arun Sao भी मौजूद रहे।
निर्माण के दौरान ही करें गुणवत्ता की निगरानी
मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सड़क निर्माण के बाद निरीक्षण करने के बजाय निर्माण के दौरान ही नियमित रूप से फील्ड में जाकर गुणवत्ता की जांच की जाए। उन्होंने कहा कि सड़कें आम जनता की सुविधा से जुड़ा अहम बुनियादी ढांचा हैं और इनकी गुणवत्ता से सरकार की छवि भी प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि यदि सड़क बनने के कुछ ही वर्षों में खराब हो जाए तो इससे सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।
बागबहार-कोतबा सड़क की हालत पर जताई नाराजगी
बैठक में बागबहार-कोतबा सड़क की खराब स्थिति पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह सड़क कुछ वर्ष पहले ही बनाई गई थी, लेकिन जल्द ही इसकी हालत खराब हो गई। यदि कोई सड़क चार साल भी नहीं चलती तो यह गंभीर लापरवाही है। मुख्यमंत्री ने इस सड़क के निर्माण में हुई कमियों की जांच कराने और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए निर्माण के दौरान ही सख्त निगरानी करने के निर्देश दिए।
टेंडर प्रक्रिया में तय हो समय-सीमा
मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क निर्माण से जुड़े टेंडर जारी होने से लेकर कार्य आवंटन तक की पूरी प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कई ठेकेदार बहुत कम दर पर टेंडर हासिल कर लेते हैं, जिससे काम की गुणवत्ता और समयसीमा प्रभावित होती है। ऐसी स्थिति में ठेकेदार की जिम्मेदारी तय की जाएगी कि वह तय गुणवत्ता और समयसीमा में काम पूरा करे।
बारिश में कटने वाले गांवों को जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में लगभग 300 ऐसे गांव चिन्हित किए गए हैं, जहां बारिश के दौरान संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। कई बार लोगों को बीमार मरीजों को खाट पर उठाकर ले जाना पड़ता है, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने निर्देश दिया कि ऐसे गांवों को सड़क और पुल-पुलियों के माध्यम से जल्द से जल्द जोड़ा जाए।
कई सड़क परियोजनाओं की हुई समीक्षा
बैठक में मनेंद्रगढ़, सूरजपुर, अंबिकापुर, पत्थलगांव, कुनकुरी, जशपुर और झारखंड सीमा तक जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-43 की प्रगति की समीक्षा की गई। करीब 353 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की वर्तमान स्थिति पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा अंबिकापुर–सेमरसोत–रामानुजगंज–गढ़वा मार्ग, गीदम–दंतेवाड़ा मार्ग, चांपा–सक्ती–रायगढ़–ओडिशा सीमा मार्ग, रायपुर–दुर्ग मार्ग सहित कई अन्य सड़क परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी ली गई।
आधुनिक डिजाइन में बनेंगे शासकीय भवन
मुख्यमंत्री ने भवन निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि राज्य में शासकीय भवनों के डिजाइन काफी पुराने और एक जैसे हैं। अब समय के अनुसार आधुनिक डिजाइन और नई तकनीक का उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भूमि के बेहतर उपयोग के लिए हॉरिजॉन्टल निर्माण की जगह वर्टिकल संरचना को बढ़ावा दिया जाना चाहिए और राजभवन में बन रहे गेस्ट हाउस को भी आधुनिक स्वरूप में तैयार किया जाए।
सड़कों के गड्ढों की जानकारी के लिए बने तंत्र
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसा सिस्टम विकसित किया जाए जिससे सड़कों पर बनने वाले गड्ढों की जानकारी समय पर मिल सके और उन्हें तुरंत ठीक किया जा सके। बैठक में मुख्य सचिव Vikas Sheel, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव Subodh Kumar Singh, लोक निर्माण विभाग के सचिव Kamalpreet Singh सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।













