पटना : कांग्रेस पार्टी ने चुनाव के दौरान टिकट बांटने की प्रक्रिया को लेकर नई रणनीति बनाई है, जिससे इस प्रक्रिया में पावर का विकेंद्रीकरण हो. टिकट वितरण में डीसीसी को भूमिका बढ़ेगी. जिला स्तर पर पार्टी को मजबूत किया जाएगा. क्या है राहुल गांधी का जिला अध्यक्षों को सियासी ताकत देने का प्लान? क्या इस बदलाव से बिहार में कांग्रेस की स्थिति बदलेगी?
दरअसल, बिहार विधानसभा का चुनाव इसी साल होना है. विधानसभा चुनाव से पहले बिहार में कांग्रेस अपने संगठन को मजबूत करने में जुट गई है. यही कारण है कि पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए जिला कमिटी के गठन में जुट गई है. जिला कमिटी की अनुशंसा के बाद ही विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों को टिकट दिया जाएगा.
सुशील पासी से खास बातचीत (Etv Bharat)
संगठन को किस तरीके से मजबूत किया जा रहा है. इस मामले पर बिहार कांग्रेस के सह प्रभारी सुशील पासी ने ईटीवी भारत से खास बातचीत. सुशील पासी ने बताया कि बिहार में कांग्रेस के स्वरुप बदलने की तैयारी चल रही है. DCC यानी जिला कांग्रेस कमिटी के गठन पर काम चल रहा है.
टिकट वितरण में DCC की भूमिका महत्वपूर्ण
ईटीवी भारत का सवाल – बिहार में इसी वर्ष विधानसभा का चुनाव होना है. पार्टी में चुनाव लड़ने को लेकर दावेदारी भी शुरू हो गई है. टिकट चयन को लेकर क्या प्रक्रिया बनाई गई है. पहले कांग्रेस में प्रत्याशियों का चयन आला कमान स्तर से हो जाता था. नीचे के कार्यकर्ताओं को पता भी नहीं चल पाता था. अब कांग्रेस जिला स्तर तक की कमेटी तक पावर का डिस्ट्रीब्यूशन कर रही है. प्रत्याशियों के चयन में जिला अध्यक्षों की क्या भूमिका होगी?
सुशील पासी का जवाब – अभी विधानसभा के चुनाव में देरी है. अभी प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया नहीं शुरू हुई है. अभी पार्टी अपने संगठन के निर्माण में लगी हुई है. जब भी प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया शुरू होगी, तब संगठन के माध्यम से ही प्रत्याशियों के चयन किए जाएंगे. इसमें जिला अध्यक्ष एवं जिला कमेटी महत्वपूर्ण इकाई होगी.
यही कारण है कि आगामी चार अप्रैल को दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय इंदिरा भवन में बिहार एवं उत्तर प्रदेश के जिला अध्यक्षों की बैठक बुलाई गई है. खुद राहुल गांधी जिला अध्यक्षों के साथ वार्ता करेंगे. प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया इस बार संगठन से होकर ही गुजरेगी. इसके अलावा भी चयन प्रक्रिया को लेकर जो कमेटी बनाई जाएगी उसके माध्यम से ही प्रत्याशियों का चयन होगा.
मेरा मानना है कि प्रत्याशियों के लोकप्रियता का पैमाना, पार्टी के प्रति उनका समर्पण, सबकुछ देखा जाएगा. इसी प्रक्रिया के तहत आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस, अपने प्रत्याशियों का चयन करेगी. फिलहाल अभी प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया नहीं चल रही है. अभी संगठन को कैसे मजबूत किया जाए उसपर काम चल रहा है.
ईटीवी भारत का सवाल – बिहार में संगठन को मजबूत करने की जिम्मेवारी आप लोगों को दी गई है. जिला स्तर तक कमेटी को मजबूत करने का टास्क दिया गया है. क्या है पूरी तैयारी?
सुशील पासी का जवाब – बिहार, कांग्रेस की धरती है. लोगों के बीच कांग्रेस पार्टी को मजबूत करने के लिए, बिहार की आवाज को सुनने और समझने के लिए, जनता की बात को कांग्रेस तक पहुंचाने और सामंजस्य स्थापित करने के लिए पार्टी के सभी नेता जिला और प्रखंड स्तर तक घूम रहे हैं. इसी के तहत जिला एवं प्रखंड का संगठन बूथ स्तर तक का संगठन का गठन हो रहा है.
2025 का वर्ष पूरे देश में कांग्रेस के लिए चुनौतियां का वर्ष है. पार्टी में टॉप टू बॉटम संगठन का सृजन अभियान चल रहा है. उसी कड़ी में बिहार में भी संगठन के सृजन का अभियान चल रहा है. बिहार में प्रदेश कमेटी जो पिछले कई वर्षों से नहीं है, वह बहुत जल्द प्रदेश कमेटी का गठन हो जाएगा.
जो जिला अध्यक्ष सक्रिय हैं, जिनका परफॉर्मेंस अच्छा है उसकी समीक्षा हो रही है. बूथ की कमेटी बनी है या नहीं बनी है, इसके लिए पार्टी के सभी वरिष्ठ पदाधिकारी जिला स्तर तक की मॉनीटरिंग कर रहे हैं. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत करके जिला स्तर तक की कमेटी में जिनकी भागीदारी है और जिनकी कम है उसकी समीक्षा की जा रही है. पार्टी में ईबीसी और ओबीसी की जो भागीदारी है वह सुनिश्चित होनी चाहिए.
जयपुर में जो कांग्रेस का अधिवेशन हुआ था, उसमें कांग्रेस के संविधान में संशोधन करते हुए यह निर्णय लिया गया था कि संगठन में 50 फीसदी पद नौजवानों को दिया जाएगा. 50 फीसदी अनुसूचित जाति, पिछड़ी जाति एवं आदिवासियों को दिए जाएंगे. कांग्रेस देश की आवाज है. यही कारण है कि पार्टी में सभी वर्ग की भागीदारी हो, इसको लेकर काम चल रहा है.
कांग्रेस मजबूती से लड़ेगी विधानसभा चुनाव
ईटीवी भारत का सवाल – आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस महागठबंधन के साथ ही चुनाव लड़ेगी? क्योंकि सीटों को लेकर अभी तक स्थिति साफ नहीं हो पाई है कि आपकी पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी?
सुशील पासी का जवाब – बिहार में कांग्रेस कितने सीटों पर चुनाव लड़ेगी यह संख्या मैं अभी नहीं बता सकता. लेकिन बिहार में जिन-जिन सीटों पर कांग्रेस मजबूत स्थिति में है, उन सीटों पर कांग्रेस चुनाव लड़ेगी और पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ेगी. सीट का आंकड़ा अभी मेरे संज्ञान में नहीं है.
ईटीवी भारत का सवाल – बिहार में कांग्रेस अभियान शुरू कर रही है, जिसमें हर घर पर कांग्रेस का झंडा लगाने की बात हो रही है. इस अभियान का उद्देश्य क्या है?
सुशील पासी का जवाब – कांग्रेस के द्वारा पूरे देश में यह अभियान चलाया जा रहा है कि जो भी कांग्रेस से जुड़े हुए लोग हैं या कांग्रेसी विचारधारा से प्रभावित हैं, उनके घर पर, उनकी गाड़ी पर, उनकी बाइक पर कांग्रेस का झंडा दिखे. इस अभियान को बिहार में नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम शुरू करने जा रहे हैं. यह अभियान बूथ स्तर तक जाएगा. पार्टी का वरिष्ठ पदाधिकारी जिला स्तर तक जाकर इस अभियान की समीक्षा करेगा और यह प्रयास करेगा कि बिहार के हर घर पर कांग्रेस का झंडा दिखाई दे.
राहुल गांधी का पटना में कार्यक्रम
ईटीवी भारत का सवाल – राहुल गांधी 3 महीने में तीसरी बार बिहार आ रहे हैं. राहुल गांधी के कार्यक्रम का कोऑर्डिनेटर आपको बनाया गया है. राहुल गांधी का बिहार दौरे का कार्यक्रम क्या है?
सुशील पासी का जवाब – 7 अप्रैल को महात्मा गांधी के नमक सत्याग्रह के आंदोलन को याद करने के लिए शहीदों को याद करने के लिए एवं बिहार की आवाज को समझने के लिए राहुल गांधी फिर से बिहार आ रहे हैं. राहुल गांधी कभी कुलियों से मिलते हैं, तो कभी सब्जी बेचने वाले और ठेला चलाने वाले से मिलते हैं.
बिहार भी राहुल गांधी लगातार आ रहे हैं और बिहार के लोगों की आवाज सुनने के लिए समझने के लिए बिहार आ रहे हैं. बिहार ज्ञान की धरती है, राहुल गांधी चाहते हैं कि जब कांग्रेस मजबूत होगी तभी बिहार मजबूत होगा. इसीलिए बिहार के लोग कांग्रेस की तरफ आशा भरी निगाह से देख रहे हैं. चाहें वह अगड़े हों या पिछड़े, दलित हों या अल्पसंख्य, सबकी आवाज राहुल गांधी हैं.
7 अप्रैल को राहुल गांधी पटना के श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल में होने वाले कार्यक्रम में शामिल होंगे. बिहार में राजनीतिक दलों ने आज पिछड़ा समाज का वोट लिया लेकिन उसके लिए कोई काम नहीं किया कोई प्लान नहीं बनाया गया. जातीय गणना होने के बाद इन छोटी-छोटी जातियों के लिए कोई प्लान होना चाहिए.
1931 में जातीय गणना हुई थी, उस वक्त इन पिछड़ी जातियों के लिए एक कार्यक्रम बनाया गया था. इनको मुख्य धारा से जोड़ने के लिए छात्रवृत्ति योजना शुरू की गई. छात्रावास बनाए गए और भी कई काम किए गए. अनुसूचित जाति के लोगों को सशक्त बनाने के लिए कांग्रेस पार्टी ने जिस तरीके की योजना बनाई थी, हम वही बिहार की परिपेक्ष्य में भी चाहते हैं. बिहार में अति पिछड़ी जाति के लिए स्पेशल फंड बनना चाहिए. ताकि इन लोगों का उत्थान हो सके.
ईटीवी भारत का सवाल – क्या राहुल गांधी चाहते हैं कि जो वोट बैंक कांग्रेस से अलग हो गया था उसको फिर से एक किया जाए?
सुशील पासी का जवाब – हम वोट बैंक के लिए राजनीति नहीं करते, भारत में जो भी वंचित समाज के लोग हैं उसको उनका हक मिले. हमें इस बात पर नाज है कि हम भारत के पहचान हैं. कांग्रेस को गाली देकर, कांग्रेस मुक्त भारत का सपना देखकर, देश की सत्ता में आ गए.
मनमोहन सिंह जैसा ईमानदार कोई नहीं था. उनके मंत्रिमंडल में 2G घोटाले के नाम पर ए राजा को बदनाम किया गया. बदनाम करने के पीछे यही कारण था कि वह अनुसूचित जाति से आते थे. उनके खिलाफ निगेटिव बनाया गया, उनको जेल तक भेजा गया लेकिन बाद में जांच में कुछ भी साबित नहीं हो सका.
राजद की बैसाखी पर कब तक राजनीति
ईटीवी भारत का सवाल – मैं बिहार परिपेक्ष्य में आपसे बात कर रहा हूं कि बिहार में आखिर कांग्रेस कब तक राजद की बैसाखी पर राजनीति करती रहेगी. आप संगठन की मजबूती की बात कर रहे हैं मैं भी यही पूछ रहा हूं कि संगठन तभी मजबूत होगा जब कार्यकर्ता आएंगे और बिहार में कांग्रेस कब तक राजद की बैसाखी पर राजनीति करेगी?
सुशील पासी का जवाब – मैं बैसाखी की बात नहीं जानता, लेकिन केंद्र में अभी जो नरेंद्र मोदी की सरकार है वह भी बैसाखी पर चल रही है. विश्व की सबसे बड़ी पार्टी केंद्र में सरकार चला रही है. बिहार में भी भाजपा सत्ता में है लेकिन वह भी दूसरे के सहयोग से सरकार चला रही है. राजनीति में चुनाव की पॉलिसी अलग होती है. इंडिया गठबंधन, भारत के संविधान को बचाने के लिए और धर्मनिरपेक्ष एवं सामाजिक न्याय लागू करने के लिए जिस जिस से गठबंधन करना पड़ेगा कांग्रेस उसके साथ गठबंधन करेगी.
बिहार कांग्रेस के स्वरूप बदलने की कोशिश : वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय ने इस पूरी बातचीत को देखने के बाद बताया कि बिहार में कांग्रेस भले ही महागठबंधन के साथ चुनाव लड़ने की बात कह रही हो लेकिन हकीकत यही है कि कांग्रेस बिहार में अपने संगठन का स्वरूप बदलने की तैयारी कर रही है. राहुल गांधी कांग्रेस की छवि को बदलने का प्रयास कर रहे हैं. यही कारण है कि चुनाव के जरिए बहुत दिनों के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे को कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया. वही प्रयोग राहुल गांधी बिहार में भी करना शुरू कर दिए हैं.
बिहार में नए प्रभारी के रूप में कृष्णा अल्लावारु को प्रभारी बनाकर भेजा गया फिर अखिलेश सिंह को अध्यक्ष पद से हटाया गया. राजद के नहीं चाहने के बावजूद कांग्रेस कन्हैया कुमार को बिहार में पदयात्रा पर निकाले हुई है. नए प्रदेश अध्यक्ष के रूप में राजेश राम को भेजा गया है. अब प्रदेश कमेटी से लेकर जिला कमेटी तक का गठन किया जा रहा है, जिनका टिकट वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका होने जा रही है.
”कांग्रेस बिहार में अपने सहयोगी दल को यह दिखने में जुट गई है कि कांग्रेस क्षेत्रीय नहीं राष्ट्रीय पार्टी है और उसी अनुरूप वह आगे की राजनीति करेगी.”- रवि उपाध्याय, वरिष्ठ पत्रकार
कांग्रेस की राजनीति पर जानकारों की राय : वरिष्ठ पत्रकार कौशलेंद्र प्रियदर्शी का मानना है कि बिहार में कांग्रेस अपने संगठन को मजबूत करने में जुटी हुई है. कारण है कि दलित, सवर्ण और अल्पसंख्यक वोट बैंक को साधने की पार्टी कोशिश कर रही है. यही कारण है कि राहुल गांधी ने बिहार प्रदेश कांग्रेस की कमान दलित चेहरे राजेश राम के हाथों में दी गई.
कांग्रेस के सामने चुनौती ? : वरिष्ठ पत्रकार कौशलेंद्र प्रियदर्शी ने बताया कि बिहार की राजनीति में कर्पूरी ठाकुर के जमाने से एक नारा लगाता था कि “पिछड़ा पावे 100 में 60”. लेकिन अब राहुल गांधी 60 नहीं 80 फीसदी की बात करते हैं. यही कारण है कि संविधान बचाओ सम्मेलन में वह हमेशा 80 फीसदी के हक की बात करते हैं. साल 2000 के बाद कांग्रेस राजद के दम पर बिहार में राजनीति करती आ रही है.
बिहार में एनडीए मजबूत स्थिति में है. सवर्ण का झुकाव भाजपा की तरफ, अति पिछड़ा वोट का झुकाव जदयू के तरफ और दलित का झुकाव चिराग पासवान की पार्टी और जीतनराम मांझी के साथ दिख रहा है. ऐसे में दलित, पिछड़ा एवं सवर्ण की राजनीति के लिए कांग्रेस को इन जातियों के बड़े नेताओं को पार्टी से जोड़ना होगा जो अपनी जातियों का वोट कांग्रेस के तरफ शिफ्ट करवा सके. भले ही कांग्रेस अपने पुराने कांबिनेशन को लेकर राजनीति शुरू कर दी है लेकिन यह इतना आसान भी नहीं है.













