रायपुर, 14 जनवरी 2026 — छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने किसानों के समक्ष मौजूद चुनौतियों और डिजिटल सिस्टम के कनेक्शन की कमजोरियों को उजागर किया है। जिले के 40 वर्षीय आदिवासी किसान ने कथित तौर पर पुनः ऑनलाइन धान टोकन नहीं मिलने के कारण बेहद हताश होकर कीटनाशक पदार्थ का सेवन कर आत्महत्या जैसा कदम उठाया। किसान की हालत गंभीर बताई जा रही है और उसे वर्तमान में सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और कृषि अधिकारियों के बीच गंभीर चिंता पैदा कर दी है, जिससे तुरंत प्रशासनिक कार्यवाही भी शुरू हो गई है। यह मामला उस सिस्टम से जुड़ा है जिसमें किसान धान बेचने के लिए ऑनलाइन ‘टोकन’ प्राप्त करते हैं। भुगतान प्रक्रिया में इस टोकन का प्रयोग अनिवार्य होता है ताकि किसान सरकारी खरीदी केंद्र पर अपना धान बेच सकें और समर्थन मूल्य भुगतान का लाभ ले सकें। किसान ने कई बार टोकन प्राप्त करने का प्रयास किया, लेकिन तकनीकी कारणों और लॉग-इन सिस्टम की जटिलताओं के चलते उसमें सफल नहीं हो सका। उसकी बार-बार असफलताओं के कारण हताशा बढ़ी और उसने यह जोखिम भरा कदम उठाया। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने तुरंत पटवारी (जमीन रिकॉर्ड अधिकारी) को निलंबित कर दिया है और तहसीलदार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। अधिकारियों ने कहा कि यह कार्रवाई “संभावित लापरवाही” और किसानों के प्रति सिस्टम की गिरावट का संकेत देती है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और किसान संगठनों ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उनका कहना है कि यदि ऑनलाइन सिस्टम किसानों के लिये सरल, स्थिर और उपयोग-अनुकूल नहीं है, तो यह उनके लिये और बड़ा मनोवैज्ञानिक तनाव पैदा करता है। कई किसान यह भी बताते हैं कि डिजिटल तकनीक का उपयोग बढ़ रहा है, लेकिन कई बार उचित टेक्निकल सहायता उपलब्ध नहीं होने से छोटे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। स्थानीय किसान नेताओं ने प्रशासन से कहा कि किसानों के लिये डिजिटल ट्रेनिंग सत्र और सपोर्ट हेल्प-लाइन जैसी सहायता उपलब्ध कराई जाए ताकि किसान बिना परेशानी के अपना धान टोकन जारी करवा सकें। कोरबा घटना में प्रशासन ने यह भी कहा है कि “किसानों की तकलीफें गंभीरता से ली जाएँगी” और घायल किसान के इलाज पर सभी सरकारी खर्च वहन किये जाएंगे। साथ ही, धान खरीद प्रणाली को और अधिक पारदर्शी, सरल और किसान-अनुकूल बनाने के लिये समीक्षा शुरू कर दी गई है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि किसानों को तकनीकी सहायता तथा युवा डिजिटल स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे सिस्टम को बेहतर ढंग से समझ सकें।













