नई दिल्ली:– बीते सप्ताह की भारी उठापटक के बाद सोमवार को सर्राफा बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली। सोना और चांदी दोनों की कीमतों में एक साथ तेज उछाल आया, जिससे निवेशकों और कारोबारियों के बीच हलचल तेज हो गई।
चांदी ₹2.65 लाख और सोना ₹1.58 लाख के करीब
बुलियन मार्केट से मिली जानकारी के अनुसार, चांदी की कीमत में ₹14,800 प्रति किलो का बड़ा उछाल दर्ज किया गया है। इसके साथ ही चांदी बढ़कर करीब ₹2.65 लाख प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई। वहीं, सोने के दाम भी ₹3,050 की तेजी के साथ ₹1.58 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गए हैं।
MCX पर भी दिखी मजबूती
शुरुआती कारोबार में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी कीमती धातुओं में मजबूती दर्ज की गई। MCX पर चांदी ₹5,185 की तेजी के साथ ₹2.49 लाख प्रति किलो पर ट्रेड करती नजर आई, जबकि सोना ₹3,428 चढ़कर ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिला सपोर्ट
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोना और चांदी मजबूत दिखाई दिए। एशियाई बाजारों में स्पॉट गोल्ड करीब 1.18% बढ़कर $5,040 प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, स्पॉट सिल्वर में 3.39% की तेजी दर्ज की गई और यह $79.89 प्रति औंस के आसपास कारोबार करता दिखा।
रिकॉर्ड हाई से अभी नीचे कीमतें
हालांकि मौजूदा तेजी के बावजूद सोना और चांदी दोनों अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से नीचे बने हुए हैं। सोना अपने ऑल-टाइम हाई से करीब 11% नीचे है, जबकि चांदी जनवरी में बने अपने उच्चतम स्तर से अब भी काफी नीचे कारोबार कर रही है।
कीमतों में तेजी की बड़ी वजह
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, जापान में प्रधानमंत्री साने ताकाइची की चुनावी जीत के बाद उदार आर्थिक नीतियों की उम्मीदें बढ़ी हैं। इसके चलते जापानी येन पर दबाव बना और निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ा, जिससे सोना और चांदी को मजबूती मिली।
अमेरिकी आंकड़ों पर टिकी नजर
निवेशकों की नजर अब अमेरिका से आने वाले रोजगार और महंगाई के आंकड़ों पर बनी हुई है। इन आंकड़ों से फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति को लेकर संकेत मिल सकते हैं, जिसका सीधा असर कीमती धातुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।
पिछले हफ्ते क्यों गिरी थीं कीमतें
बीते सप्ताह सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट की मुख्य वजह मुनाफावसूली, डॉलर में मजबूती और बॉन्ड यील्ड्स में बढ़ोतरी रही थी। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक आर्थिक आंकड़े आगे की दिशा तय करेंगे।












