हाइलाइट्स
चैत्र नवरात्रि में माता शीतला का दर्शन करें.
कड़ा धाम में स्थित है माता शीतला का मंदिर.
भौतिक बाधा से पीड़ित लोग माता से पाते हैं राहत.
चैत्र की नवरात्रि शुरू होते ही भौतिक बाधा से पीड़ित लोग यहां माता शीतला के दर्शन करने के लिए अधिक संख्या में पहुंचने लगते हैं. मां शीतला का ये मंदिर 51 शक्तिपीठों में एक है, जो उत्तर प्रदेश कौशांबी जिले के कड़ा धाम में स्थित है. पीड़ित लोग पहले माँ गंगा का स्नान करते हैं और फिर उसके बाद गंगा जल लेकर माता शीतला का दर्शन करते हैं. जो लोग भौतिक बाधा से पीड़ित रहते हैं वो लोग माता रानी के आशीर्वाद से ठीक होकर जाते हैं.
भौतिक बाधा से मिलता है छुटकारा
भौतिक बाधा से परेशान लोग अधिकतर चैत्र की नवरात्रि में ही माता के दरबार में आते हैं और माता रानी का दर्शन करके अपना दुख दूर करके जाते हैं. माता शीतला चेचक दाग, सफ़ेद दाग, भौतिक बाधा से परेशान ऐसी तमाम समस्याओं का माता निवारण करती हैं.
: नवरात्रि में धन प्राप्ति और कर्ज मुक्ति के लिए कई उपाय किए जाते हैं. कई लोग कर्ज की समस्या से जूझ रहे होते हैं या धन की तंगी से परेशान रहते हैं. ऐसे में ये उपाय नवरात्रि के दिन विशेष रूप से लाभकारी माने जाते हैं. आज हम आपको कमल गट्टे के बीज से किए जाने वाले कुछ खास उपाय के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे आप चैत्र नवरात्रि के दौरान कर सकते हैं. ये उपाय आपकी धन-संबंधी समस्याओं को दूर करने में मदद कर सकता हैं. आइए जानते हैं ज्योतिषाचार्य धर्मेंद्र दीक्षित से इस उपाय के बारे में.
कर्ज मुक्ति के लिए
अगर आप कर्ज से छुटकारा पाना चाहते हैं तो आपको सिर्फ एक कमल गट्टे का बीज लेना होगा.
फिर एक तांबे का लोटा लें और उसमें स्वच्छ जल भरें.
इसमें एक कमल गट्टे का बीज डाल दें.
इस उपाय को प्रदोष काल में करें.
इस जल को शिवलिंग पर चढ़ाएं और बीज को वहीं छोड़ दें.
इस दौरान 21 बार “ॐ ऋण-मुक्तेश्वर महादेवाय नमः” मंत्र का जाप करें.
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यह उपाय नवरात्रि के किसी भी दिन किया जा सकता है, लेकिन प्रदोष काल में करने से इसका प्रभाव और बढ़ जाता है.
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धन प्राप्ति के लिए उपाय
कमल गट्टे के बीजों की माला (108 बीजों की) धन प्राप्ति के लिए बहुत लाभकारी मानी जाती है.
सबसे पहले 108 कमल गट्टे के बीजों की माला लें.
आपके घर में अगर माता लक्ष्मी की मूर्ति है तो पहले माला को नीचे रखें और मूर्ति को उसके ऊपर स्थापित करें.
अगर मूर्ति नहीं है तो आप माला को माता लक्ष्मी की तस्वीर के पास रख सकते हैं.
जब भी माता लक्ष्मी की पूजा करें, विशेषकर शुक्रवार के दिन 108 बार “ॐ महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जाप करें.
इस उपाय से रुका हुआ धन आने लगेगा और नए स्रोत भी बनेंगे.
अष्टमी या नवमी को करें ये विशेष उपाय
यह उपाय नवरात्रि के अष्टमी और नवमी तिथि को करने से सबसे अधिक प्रभावशाली होता है.
एक दिन पहले 108 कमल गट्टे के बीज लेकर उन्हें देशी घी में भिगो दें.
अष्टमी या नवमी के दिन, माता लक्ष्मी की पूजा करें और इन बीजों को अग्नि में आहुति दें.
इस दौरान “ॐ महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जाप करें.
यह उपाय करने से माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और घर में धन की वृद्धि होती है.
Chaitra Navratri 2025: आदिशक्ति मां जगदंबा की उपासना का पर्व चैत्र नवरात्रि 30 मार्च से शुरू हो गया है और पूरे जिले में भक्ति का माहौल छाया हुआ है. इस पावन अवसर पर कोरबा वासियों की प्रथम आराध्य देवी, मां सर्वमंगला के मंदिर में भक्तों का तांता लगा हुआ है. हसदेव नदी के किनारे स्थित यह मंदिर न केवल कोरबा बल्कि पूरे देश और विदेश में अपनी महिमा के लिए जाना जाता है. मां सर्वमंगला के दरबार में भक्तों की अटूट आस्था का ही परिणाम है कि यहां मांगी गई हर मुराद पूरी होती है. यही कारण है कि राज्य और देश के कोने-कोने से ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार से भी श्रद्धालु यहां माता के मंदिर में मनोकामना ज्योति कलश जलवाने आते हैं.
लगभग 124 साल पुराने इस मंदिर को लेकर कोरबा वासियों की आस्था इतनी गहरी है कि नवरात्र के समय यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं. प्रत्येक वर्ष दोनों ही नवरात्रों में यहां मनोकामना ज्योति कलश जलाए जाते हैं. इस चैत्र नवरात्रि में मंदिर के पुजारी मयंक पांडे ने बताया कि 5 हजार से ज्यादा तेल के और 700 से अधिक घी के मनोकामना द्वीप प्रज्वलित किए गए हैं.
विदेशी भक्तों ने भी यहां ज्योत जलवाई
इस मंदिर की नवरात्रि और भी खास है. मां सर्वमंगला के प्रति आस्था की डोर इतनी मजबूत है कि यह सीमाओं को भी पार कर जाती है. चैत्र नवरात्रि में ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, न्यूजीलैंड और इंडोनेशिया जैसे देशों में रहने वाले माता के भक्तों ने भी यहां ज्योत जलवाई है. यह देखकर लगता है कि मां सर्वमंगला की कृपा और आशीर्वाद हर जगह अपने भक्तों पर बना हुआ है. यह सचमुच अद्भुत है कि आज के आधुनिक युग में भी लोगों की आस्था और विश्वास इतना अटूट है. मां सर्वमंगला का मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह एक ऐसा केंद्र भी है जो लोगों को जोड़ता है और उन्हें उम्मीद और शक्ति प्रदान करता है.
: आदिशक्ति मां जगदंबा की उपासना का पर्व चैत्र नवरात्रि 30 मार्च से शुरू हो गया है और पूरे जिले में भक्ति का माहौल छाया हुआ है. इस पावन अवसर पर कोरबा वासियों की प्रथम आराध्य देवी, मां सर्वमंगला के मंदिर में भक्तों का तांता लगा हुआ है. हसदेव नदी के किनारे स्थित यह मंदिर न केवल कोरबा बल्कि पूरे देश और विदेश में अपनी महिमा के लिए जाना जाता है. मां सर्वमंगला के दरबार में भक्तों की अटूट आस्था का ही परिणाम है कि यहां मांगी गई हर मुराद पूरी होती है. यही कारण है कि राज्य और देश के कोने-कोने से ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार से भी श्रद्धालु यहां माता के मंदिर में मनोकामना ज्योति कलश जलवाने आते हैं.लगभग 124 साल पुराने इस मंदिर को लेकर कोरबा वासियों की आस्था इतनी गहरी है कि नवरात्र के समय यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं. प्रत्येक वर्ष दोनों ही नवरात्रों में यहां मनोकामना ज्योति कलश जलाए जाते हैं. इस चैत्र नवरात्रि में मंदिर के पुजारी मयंक पांडे ने बताया कि 5 हजार से ज्यादा तेल के और 700 से अधिक घी के मनोकामना द्वीप प्रज्वलित किए गए हैं.
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इस मंदिर की नवरात्रि और भी खास है. मां सर्वमंगला के प्रति आस्था की डोर इतनी मजबूत है कि यह सीमाओं को भी पार कर जाती है. चैत्र नवरात्रि में ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, न्यूजीलैंड और इंडोनेशिया जैसे देशों में रहने वाले माता के भक्तों ने भी यहां ज्योत जलवाई है. यह देखकर लगता है कि मां सर्वमंगला की कृपा और आशीर्वाद हर जगह अपने भक्तों पर बना हुआ है. यह सचमुच अद्भुत है कि आज के आधुनिक युग में भी लोगों की आस्था और विश्वास इतना अटूट है. मां सर्वमंगला का मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह एक ऐसा केंद्र भी है जो लोगों को जोड़ता है और उन्हें उम्मीद और शक्ति प्रदान करता है.













