श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश), 9 नवंबर 2025 — भारत ने आज सुबह अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आज सुबह 6:45 बजे अपने नवीनतम मिशन “सूर्ययान-2” को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह मिशन सूर्य के ध्रुवीय क्षेत्रों के रहस्यों को जानने के लिए भेजा गया है और इसे देश की सबसे जटिल वैज्ञानिक परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है।इसरो ने इस मिशन को पीएसएलवी-सी67 रॉकेट के माध्यम से श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से प्रक्षेपित किया। प्रक्षेपण के लगभग 18 मिनट बाद यह यान सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में स्थापित हो गया और वहां से यह अपनी 110 दिन की यात्रा पर सूर्य की कक्षा की ओर रवाना हो गया।इसरो प्रमुख डॉ. एस. सोमनाथ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि “सूर्ययान-2 का लक्ष्य सूर्य के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों से निकलने वाले सौर पवनों (Solar Winds) और चुंबकीय विकिरण (Magnetic Radiation) का अध्ययन करना है।” उन्होंने यह भी कहा कि यह मिशन “सूर्य के तापमान और उसके चक्रवाती तूफानों की संरचना” को समझने में मदद करेगा।यह मिशन पूरी तरह से भारत द्वारा विकसित तकनीक पर आधारित है। वैज्ञानिकों ने इसमें अत्याधुनिक उपकरण जैसे ‘पोलर सोलर रेडिएशन एनालाइज़र’, ‘प्लाज्मा सेंसर’ और ‘एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर’ लगाए हैं। ये उपकरण सूर्य की सतह और उसके ऊपरी वातावरण से निकलने वाले विकिरणों की निगरानी करेंगे।इसरो के अनुसार, “सूर्ययान-2” मिशन की लागत लगभग ₹420 करोड़ है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समान मिशनों की तुलना में बेहद किफायती है। इस मिशन को ‘Make in India Space Mission’ की सफलता के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इसके लगभग सभी पुर्जे और सॉफ्टवेयर भारत में ही बनाए गए हैं।













