नई दिल्ली:– 29 जनवरी 2026 को जया एकादशी का व्रत रखा जाने वाला है। यह व्रत जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित है। जो हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन रखा जाता है। इस दिन का सनातन धर्म में विशेष महत्व है।
ज्योतिष गणना के अनुसार, पंचांग के अनुसार, इस साल यह पवित्र तिथि 29 जनवरी, दिन गुरुवार को पड़ रही है। गुरुवार का दिन और एकादशी की तिथि का यह अद्भुत संयोग भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए बेहद शुभ अवसर है। ऐसे में इस रात कुछ गुप्त उपाय किए जाएं, तो व्यक्ति की सोई हुई किस्मत जाग सकती है और जीवन से दरिद्रता का नाश हो सकता है, तो आइए उन उपायों को जानते हैं।
जया एकादशी की रात क्या उपाय करें?
जया एकादशी की रात को भगवान विष्णु की विशेष पूजा करने से घर में सुख-शांति और धन-समृद्धि आती है। नीचे कुछ प्रमुख उपाय दिए गए हैं-
अखंड दीपक जलाएं
ज्योतिषयों के अनुसार, एकादशी की रात को भगवान विष्णु के सामने गाय के घी का एक अखंड दीपक जलाएं। अगर संभव हो तो इसमें थोड़ा सा केसर भी डालें। यह दीपक पूरी रात जलता रहे। कहा जाता है कि ऐसा करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और लक्ष्मी जी का स्थायी वास माना जाता है।
तुलसी के पास नौ दीपक
एकादशी के दिन शाम के समय तुलसी के पौधे के पास नौ दीपक जलाएं और उनकी परिक्रमा करें। लेकिन, भूलकर भी एकादशी के दिन तुलसी में जल अर्पित न करें, साथ ही पत्ते भी तोड़े।
कहा जाता है कि, शाम को दीपदान करने से वैवाहिक जीवन की कठिनाइयाँ दूर होती हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
विष्णु सहस्रनाम का पाठ
रात के समय श्री हरि के सामने विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। अगर आप खुद पढ़ नहीं सकते, तो सुनें।
ऐसा माना जाता है कि जया एकादशी की रात विष्णु सहस्रनाम का जप करने से अटके हुए काम पूरे होते हैं और भाग्य का साथ मिलता है।
पीले वस्त्र में कौड़ियां
आर्थिक तंगी दूर करने के लिए एकादशी की रात भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के चरणों में 5 पीली कौड़ियां रखें। अगले दिन सुबह इन्हें पीले कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखें। ऐसा करने से धन के नए मार्ग खुलते हैं।
नाम जप
एकादशी की रात को सोने से पहले या जागरण के दौरान भगवान विष्णु के नामों का जप करें। ऐसा करने से कुंडली में मौजूद ग्रह दोष दूर होते हैं।
इन नियमों का रखें विशेष ध्यान
जया एकादशी की रात को पूरी तरह सात्विक रहें।
रात्रि जागरण करें।
इस दिन किसी की निंदा न करें और न ही क्रोध करें।
अपनी वाणी और विचारों में पवित्रता बनाए रखें













