। राजधानी रायपुर स्थित कृष्णा पब्लिक स्कूल, डूंडा ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ का नाम राष्ट्रीय पटल पर रोशन किया है। विद्यालय को जल संरक्षण एवं प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा प्रदत्त ‘6वां राष्ट्रीय जल पुरस्कार’ प्राप्त हुआ है।नई दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने यह सम्मान विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती प्रियंका त्रिपाठी को प्रदान किया।कड़ी चयन प्रक्रिया के बाद मिली राष्ट्रीय उपलब्धिराष्ट्रीय स्तर पर इस पुरस्कार के चयन हेतु जल शक्ति मंत्रालय ने एक 5 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। समिति ने देशभर के विभिन्न राज्यों के विद्यालयों के बीच विस्तृत मूल्यांकन किया।मूल्यांकन के प्रमुख आधार रहे—जल संरक्षण तकनीकेंपर्यावरण कार्यों की प्रभावशीलताविद्यार्थियों की सहभागितासमुदाय के साथ संयुक्त प्रयासइन सभी बिंदुओं पर गहन अध्ययन और निरीक्षण के बाद समिति ने ‘सर्वश्रेष्ठ विद्यालय श्रेणी’ के लिए कृष्णा पब्लिक स्कूल, डूंडा का चयन किया।विद्यालय के प्रयास बने राष्ट्रीय उदाहरणसमिति की रिपोर्ट के अनुसार विद्यालय द्वारा जल संरक्षण की दिशा में किए गए प्रयास भविष्य के लिए आदर्श और टिकाऊ हैं। प्रमुख पहलें—• अत्याधुनिक वर्षा जल संचयन प्रणालीस्कूल परिसर में आधुनिक रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से बरसाती पानी सीधे भू-जल स्तर को मजबूत करने में उपयोग हो रहा है।• गंदे पानी के पुनर्चक्रण (रिसाइक्लिंग) की व्यवस्थाविद्यालय ने कैंपस में उपयोग होने वाले पानी को पुनर्चक्रित कर दोबारा प्रयोग में लाने की प्रणाली स्थापित की है, जिससे प्रतिदिन हजारों लीटर पानी की बचत हो रही है।• विद्यार्थियों में जागरूकता हेतु ‘जल बचाओ अभियान’स्कूल नियमित रूप से जागरूकता गतिविधियाँ, रैली, प्रतियोगिताएँ और कार्यशालाएँ आयोजित कर छात्रों में जल-संवेदनशीलता बढ़ा रहा है।• सामुदायिक जल प्रबंधन कार्यक्रमविद्यालय ने आसपास की बस्तियों और स्थानीय समूहों को जोड़ते हुए सामुदायिक स्तर पर जल प्रबंधन कार्यक्रम चलाए, जिसका व्यापक सकारात्मक प्रभाव दिखाई दिया।छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षणराष्ट्रीय जल पुरस्कार मिलने से विद्यालय प्रबंधन, शिक्षक, छात्र और अभिभावकों में उत्साह का माहौल है। स्कूल प्रशासन ने इसे टीमवर्क, पर्यावरणीय प्रतिबद्धता और सतत प्रयासों का परिणाम बताया।कृष्णा पब्लिक स्कूल, डूंडा का यह उपलब्धि न केवल प्रदेश का मान बढ़ाती है, बल्कि पूरे देश के शैक्षणिक संस्थानों के लिए प्रेरणादायी उदाहरण स्थापित करती है।













