छत्तीसगढ़ :– विधानसभा के बजट सत्र के 15वें दिन प्रश्नकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। सदन में एक ओर जहां खतरनाक अपशिष्ट उत्पन्न करने वाले उद्योगों की निगरानी और उनके अपशिष्ट प्रबंधन का मामला उठा, वहीं छातिम और सप्तपर्णी जैसे वृक्षों के रोपण पर भी गंभीर बहस देखने को मिली। इसके अलावा कर्मचारियों के NPS से OPS चयन और मैनपाट स्थित कर्मा एथेनिक रिसोर्ट की लागत व रखरखाव से जुड़े सवालों पर भी सरकार ने विस्तार से जवाब दिया।
अपशिष्ट उत्पन्न करने वाले उद्योगों पर नेता प्रतिपक्ष ने उठाए सवाल
प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने राज्य में खतरनाक अपशिष्ट उत्पन्न करने वाले उद्योगों की संख्या और उनकी निगरानी व्यवस्था को लेकर सरकार से जानकारी मांगी। उन्होंने पूछा कि ऐसे उद्योगों पर नियंत्रण और प्रदूषण की निगरानी के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं।
इस पर आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने सदन को बताया कि प्रदेश में वर्तमान समय में 665 ऐसे उद्योग संचालित हैं, जो खतरनाक अपशिष्ट उत्पन्न करते हैं। उन्होंने कहा कि इन उद्योगों की निगरानी के लिए फिलहाल 19 उद्योगों में ऑनलाइन एमीशन मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए गए हैं। हालांकि, मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इन सिस्टम की स्थापना के लिए अलग से कोई विशेष राशि स्वीकृत नहीं की गई है।
मंत्री ने आगे जानकारी दी कि बाकी उद्योगों में भी अगले दो महीनों के भीतर ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने की कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी। उन्होंने कहा कि केवल तकनीकी निगरानी पर ही निर्भर नहीं रहा जा रहा, बल्कि अधिकारी लगातार मौके पर पहुंचकर उद्योगों का भौतिक निरीक्षण भी कर रहे हैं। हजार्डस मेटल और अन्य अपशिष्टों के मामले में जांच और कार्रवाई जारी है, ताकि पर्यावरणीय मानकों का पालन कराया जा सके।
बालको के अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर भी मांगी गई जानकारी
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने बालको में निकलने वाले वेस्ट और उसके निपटान की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया। इस पर मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि बालको से चार प्रकार के अपशिष्ट निकलते हैं और उनके प्रबंधन के लिए जरूरी व्यवस्थाएं की गई हैं।
उन्होंने कहा कि वहां प्रतिवर्ष 60 हजार मीट्रिक टन अपशिष्ट को रिसाइकिल करने की व्यवस्था मौजूद है। सरकार ने यह भी संकेत दिया कि ऐसे बड़े उद्योगों में अपशिष्ट निपटान और पर्यावरणीय अनुपालन को लेकर निगरानी की जा रही है।
छातिम वृक्षों के रोपण पर विधानसभा में गरमाई बहस
विधायक सुनील सोनी ने सदन में छातिम वृक्षों के रोपण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इन पौधों की वजह से अस्थमा और संक्रमण जैसी स्वास्थ्य समस्याएं सामने आ रही हैं। उन्होंने छातिम वृक्षों के रोपण पर रोक लगाने और पहले से लगे पौधों को हटाने की मांग की।
इस पर मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि अभी तक छातिम वृक्षों के रोपण पर कोई औपचारिक रोक नहीं लगाई गई है और न ही इस संबंध में फिलहाल कोई प्रस्ताव लागू है। लेकिन उन्होंने यह भी माना कि यदि किसी वृक्ष से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है, तो सरकार इस पर सकारात्मक निर्णय लेने के लिए तैयार है।
मंत्री ने कहा कि पेड़ तो आमतौर पर स्वास्थ्य और पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए लगाए जाते हैं, लेकिन यदि कोई विशेष प्रजाति नुकसानदेह साबित होती है, तो उस पर पुनर्विचार किया जाएगा।
भविष्य में नहीं लगाए जाएंगे सप्तपर्णी और छातिम के पौधे
सदन में चर्चा आगे बढ़ने पर मंत्री ओपी चौधरी ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि भविष्य में छातिम के पौधे नहीं लगाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सप्तपर्णी के पौधों को लेकर भले ही अभी स्पष्ट वैज्ञानिक जानकारी नहीं मिली हो, लेकिन एहतियात के तौर पर इन्हें भी आगे नहीं लगाया जाएगा।
मंत्री ने कोनोकार्पस वृक्षों का भी जिक्र किया और कहा कि इस प्रजाति को लेकर रिसर्च में प्रतिकूल बातें सामने आई हैं, इसलिए उस पर भी रोक लगाने की दिशा में निर्णय लिया जाएगा।
रायपुर में बड़ी संख्या में लगे छातिम के पौधों को लेकर विधायक सुनील सोनी ने चिंता जताई और कहा कि इन्हें हटाया जाना चाहिए। इस पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सुझाव दिया कि सुनील सोनी की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई जाए, जो ऐसे पौधों की जांच कर रिपोर्ट पेश करे।
वहीं विधायक धर्मजीत सिंह ने भी इस मुद्दे पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि हरे-भरे पौधे इंसानों के लिए हानिकारक साबित हो रहे हैं, तो ऐसे वृक्षों को काट देना चाहिए। जवाब में मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि विभाग वैज्ञानिकों की एक टीम गठित करेगा, जो इन पौधों के प्रभावों का अध्ययन करेगी।
NPS से OPS चुनने वाले कर्मचारियों की संख्या पर सरकार ने दी जानकारी
प्रश्नकाल में कर्मचारियों की पेंशन योजना का मुद्दा भी उठा। विधायक पुन्नूलाल मोहले ने सरकार से पूछा कि प्रदेश में कितने अधिकारी-कर्मचारियों ने NPS से दोबारा OPS का चयन किया है और इस पेंशन व्यवस्था का संचालन किस तरह किया जा रहा है।
इस पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने सदन में बताया कि प्रदेश में कुल 2 लाख 91 हजार 797 अधिकारी-कर्मचारियों ने NPS से फिर से OPS का विकल्प चुना है। उन्होंने कहा कि इन कर्मचारियों की पेंशन योजना का संचालन छत्तीसगढ़ सिविल सेवा पेंशन नियम 1976 के प्रावधानों के अनुसार किया जा रहा है।
मंत्री ने यह भी बताया कि 15 फरवरी 2026 तक छत्तीसगढ़ पेंशन निधि में 1,068 करोड़ रुपए जमा किए गए हैं, जिससे 1,120.53 करोड़ रुपए की निधि तैयार हुई है। इस जानकारी से यह स्पष्ट हुआ कि OPS में लौटने वाले कर्मचारियों के लिए सरकार वित्तीय प्रबंधन की दिशा में काम कर रही है।
कर्मा एथेनिक रिसोर्ट पर भी सदन में पूछे गए सवाल
विधानसभा में मैनपाट स्थित कर्मा एथेनिक रिसोर्ट का मामला भी उठा। विधायक रामकुमार टोप्पो ने रिसोर्ट के लिए आवंटित भूमि, लागत, DPR और उसमें शामिल कार्यों की जानकारी मांगी।
इस पर पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने बताया कि मैनपाट का कर्मा एथेनिक रिसोर्ट पहाड़ और चट्टान मद के अंतर्गत बनाया गया है। यह परियोजना 8 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर विकसित की गई है और इसकी लागत 21 करोड़ रुपए से ज्यादा है।
उन्होंने कहा कि रिसोर्ट के DPR में कुल 32 अलग-अलग कार्य शामिल थे और सभी कार्य तय समय में पूरे कर लिए गए। मंत्री ने यह भी बताया कि जनवरी 2026 में रिसोर्ट के मासिक रखरखाव पर 67 हजार 630 रुपए खर्च किए गए।
बजट सत्र के 15वें दिन कई अहम संकेत
विधानसभा के बजट सत्र के 15वें दिन की कार्यवाही ने यह साफ कर दिया कि सरकार पर्यावरण, उद्योग, पेंशन और पर्यटन जैसे मुद्दों पर जवाब देने के लिए सदन में अपनी स्थिति स्पष्ट कर रही है। अपशिष्ट उत्पन्न करने वाले उद्योगों में ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम बढ़ाने की बात हो या छातिम, सप्तपर्णी और कोनोकार्पस जैसे पौधों पर भविष्य में रोक का संकेत, सरकार ने कई मामलों में नीति संबंधी रुख सामने रखा।
इसके साथ ही NPS से OPS में लौटे कर्मचारियों की बड़ी संख्या और पेंशन निधि की स्थिति ने कर्मचारियों से जुड़े महत्वपूर्ण वित्तीय पक्ष को उजागर किया। वहीं मैनपाट के कर्मा एथेनिक रिसोर्ट पर दी गई जानकारी ने पर्यटन परियोजनाओं की लागत और रखरखाव के पक्ष को भी सामने रखा।













