जलपाईगुड़ी: हाथियों की ट्रेन से टकराने से होने वाली मौतों को रोकने के लिए रेलवे और वन विभाग ने एक अनूठी पहल की है. विभाग की तरफ से जानवरों को बचाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कि AI का इस्तेमाल किया जा रहा है. अब ‘एआई एलीसेंस लाइव’ हाथी या अन्य बड़े जानवर के रेलवे ट्रैक के पास या उस पर आने पर वीडियो और तस्वीरें भेजेगा.
पश्चिम बंगाल में यह पहली बार है जब एलीसेंस लाइव तकनीक के जरिए रेलवे और वन विभाग को वीडियो के साथ चेतावनी का मैसेज भी मिलेगा. इस तरह उन्हें पता चल जाएगा कि रेलवे ट्रैक के पास कितने हाथी हैं और वे किस दिशा में जा रहे हैं. एलीसेंस लाइव इस संदेश और उनके लोकेशन के वीडियो को रेलवे और वन विभाग दोनों को एक साथ शेयर करेगा.
हाथियों की ट्रेन से टकराने से होने वाली मौतों को रोकने के लिए पहले भी कई कदम उठाए गए थे. इसके लिए कई जगहों पर एलीसेंस अलार्मिंग सिस्टम लगाए गए थे. जिसका नतीजा यह हुआ कि हाथी के रेलवे ट्रैक के पास आने पर संदेश,तस्वीर और वीडियो के जरिए संकेत मिल जाते थे. तकनीक के इस्तेमाल से ट्रेन से टकराने पर हाथियों की मौतों की संख्या में काफी हद तक कमी आई है.
वैसे रेलवे स्पीड को भी नियंत्रित कर सकता है. अगर पटरी पर कोई चलता हुआ पता लग जाता है, तो ऐसे में ट्रेन को रोक दिया जाता है. शुरुआत में हाथी की शारीरिक बनावट को देखते हुए डिवाइस लगाए जाते थे.हालांकि, हाथी के बच्चे के आने पर सेंसर इसलिए काम नहीं करता था क्योंकि, डिवाइस को बड़े हाथियों के साइज के हिसाब से फिट किया जाता था.
एलीसेंस लाइव तकनीक से सेंसर द्वारा सभी की तस्वीर और वीडियो ली जाएगी और कैप्चर की जाएगी. एआई एलीसेंस लाइव जानवरों के आने का संदेश तस्वीरों और वीडियो के माध्यम से देगा. जंगल के बीच हाथी गलियारे में लगाई गई अत्याधुनिक डिवाइस के चोरी होने का खतरा है.
हालांकि, इस मामले में अगर कोई इसे चुराने की कोशिश भी करेगा, तो वह खतरे में पड़ जाएगा क्योंकि जैसे ही चोर कैमरे के सामने आएगा उसकी तस्वीर भी खींची जाएगी और अलार्म बज जाएगा. साथ ही संदेश रेलवे और वन विभाग को भी उसी समय भेजा जाएगा.
रेलवे ट्रैक पर हाथी गलियारे पर हाथियों को ट्रेनों की चपेट में आने से बचाने के लिए वॉयस फॉर एलीफेंट सपोर्ट ने इस डिवाइस को लगाने के लिए फंड दिया है. स्नैप फाउंडेशन उनका समर्थन कर रहा है.
यह डिवाइस कैसे संदेश भेजेगा?
जब कोई हाथी या कोई अन्य जानवर रेलवे ट्रैक के 30 मीटर के दायरे में आता है तो यह डिवाइस तस्वीरें और वीडियो लेकर रेलवे और वन विभाग के पास अलार्म बजाएगा. इसमें एक पैटर्न सेंसर होता है जो वन्यजीवों की ऊंचाई,शरीर के तापमान को देखकर सेंसर सक्रिय हो जाएंगे.इसके अलावा सेंसर इंसानों की भी पहचान करने में सक्षम है.
वहीं डिवाइस की रिकॉर्डिंग सप्ताह के सातों दिन और 24 घंटे जारी रहेगी. तस्वीरें और वीडियो स्वचालित रूप से क्लाउड स्टोरेज में स्टोर हो जाएगा. गोरुमारा नेशनल पार्क, जलदापारा नेशनल पार्क और बक्सा टाइगर प्रोजेक्ट के रेलवे ट्रैक के हाथी गलियारे में कुल 90 एलीसेंस लाइव लगाए जाएंगे. कैलिफोर्निया की फंडिंग एजेंसी वॉयेज फॉर एशियन एलीफेंट सपोर्ट इस प्रोजेक्ट पर 58 लाख रुपए खर्च कर रही है.













