अमरावती: कोरोना महामारी के दौरान मजबूरी में शुरू किया गया ‘वर्क फ्रॉम होम’ अब कई राज्यों की सरकारों की नीतियों का भी हिस्सा बन रहा है. आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से किए गए एक हालिया सर्वेक्षण से खुलासा हुआ है कि राज्य में 24.82 लाख लोग घर से काम करने को तैयार हैं. यह सर्वे पिछले महीने शुरू हुआ था. सरकार की ‘वर्क-फ्रॉम-होम’ नीति को बढ़ावा देने की पहल का हिस्सा है.
सर्वे में किनको चुना गयाः यह डेटा 18 से 50 वर्ष की आयु के उन लोगों से एकत्र किया गया है, जिनके पास इंटरमीडिएट, डिग्री, डिप्लोमा और उच्च शिक्षा योग्यता है. अब तक अधिकारियों ने राज्य की कुल 2.68 करोड़ पात्र आबादी में से 99.26 लाख लोगों का सर्वेक्षण किया है. निष्कर्ष जिला कलेक्टरों की बैठक के दौरान प्रस्तुत किए गए. सरकार का मानना है कि इस नीति से लोगों को घर बैठे रोजगार के अवसर मिलेंगे, वहीं राज्य में ‘डिजिटल वर्कफोर्स’ मजबूत होगी.
बुनियादी ढांचे की पहचानः सचिवालय के अनुसार सर्वेक्षण में शामिल लोगों में 11.75 लाख लोगों के पास इंटरमीडिएट और उच्च शिक्षा योग्यता है. 13.06 लाख लोगों ने डिप्लोमा या उच्च शिक्षा पूरी की है. सर्वेक्षण में राज्य भर में 118 सरकारी भवनों की भी पहचान की गई है, जिनका उपयोग संभावित रूप से घर से काम करने के लिए किया जा सकता है. 1,397 लोगों ने कहा कि उचित व्यवस्था होने पर वे इन केंद्रों से काम करने में सक्षम हो सकते हैं.
2 लाख से ज़्यादा लोग वर्क फ्रॉम होमः सर्वेक्षण में पाया गया कि 2 लाख 13 हजार 971 लोग पहले से ही घर से काम कर रहे हैं. अधिकारियों ने बताया कि उनमें से ज़्यादातर लोग बेंगलुरु और हैदराबाद में आईटी कंपनियों के लिए काम कर रहे हैं. सर्वेक्षण का बाकी हिस्सा अप्रैल के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है. सरकार इन निष्कर्षों का उपयोग राज्य में योग्य व्यक्तियों के लिए घर से काम करने के अवसर और सहायक बुनियादी ढांचे का निर्माण करने के लिए योजना बना रही है.













