नई दिल्ली, 8 नवंबर 2025 — आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विज्ञान भवन में आयोजित “राष्ट्रीय कानूनी सहायता एवं मध्यस्थता सम्मेलन 2025” का उद्घाटन किया। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य देश में न्याय प्रदान प्रणाली को और अधिक पारदर्शी, त्वरित और आम जन के लिए सुलभ बनाना था।अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि “न्याय केवल किताबों में नहीं, बल्कि आम नागरिक के जीवन में दिखना चाहिए।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार का लक्ष्य “सबका न्याय — सबका विश्वास” के सिद्धांत पर काम करना है। मोदी ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में करीब 8 लाख मुकदमों का समाधान मध्यस्थता एवं लोक अदालतों के जरिए हुआ है, जिससे अदालतों का बोझ घटा है और लोगों को तेजी से न्याय मिला है।सम्मेलन में भारत के मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़, कानून मंत्री किरन रिजिजू और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के अधिकारी उपस्थित थे। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि देश में लगभग 4.5 करोड़ मामले लंबित हैं और ऐसे में मध्यस्थता एवं डिजिटल न्याय व्यवस्था आशा की किरण हैं।मोदी ने अपने भाषण में कहा कि भारत अब “ई-कोर्ट” और “वर्चुअल हीयरिंग” की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि अब देश के ज्यादातर जिला अदालतों में डिजिटल फाइलिंग और ऑनलाइन केस ट्रैकिंग की सुविधा शुरू हो चुकी है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी न्यायिक सहायता मिल रही है।प्रधानमंत्री ने कानून छात्रों और युवाओं से अपील की कि वे “लीगल एड कैम्प” में स्वयंसेवक के रूप में भाग लें ताकि गांव-गांव तक कानूनी जागरूकता फैले। उन्होंने कहा कि “न्याय का मतलब सिर्फ फैसला नहीं, बल्कि विश्वास की स्थापना है।”सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री ने ‘न्याय सहज पोर्टल’ का भी उद्घाटन किया, जिसके माध्यम से लोग ऑनलाइन मुफ्त कानूनी सलाह, मामले की जानकारी और वकीलों से संपर्क कर सकेंगे। यह प्लेटफ़ॉर्म देश के हर राज्य के विधिक सेवा प्राधिकरण से जुड़ा हुआ है।कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री ने न्यायिक संस्थाओं से अपील की कि वे लंबित मुकदमों को तेजी से सुलझाने के लिए तकनीकी उपकरणों का अधिक से अधिक उपयोग करें। उन्होंने कहा कि “साल 2030 तक भारत को ऐसा देश बनाना है जहाँ कोई भी मामला 10 वर्षों तक लंबित न रहे।”सम्मेलन के अंतर्गत विभिन्न राज्यों के मुख्य न्यायाधीशों और कानूनी विशेषज्ञों ने अपने राज्यों की सफल पहलों की जानकारी दी। छत्तीसगढ़ राज्य के प्रतिनिधियों ने बताया कि उनके राज्य में पिछले एक वर्ष में 20 हजार से अधिक मामले लोक अदालतों द्वारा सुलझाए गए हैं।यह सम्मेलन देश के न्यायिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार और न्यायपालिका मिलकर इन सुधारों को सफल बनाती है, तो भारत विश्व के उन चुनिंदा देशों में शुमार हो सकता है जहाँ न्याय सिर्फ कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक जन-आंदोलन के रूप में स्थापित होगा।













