नई दिल्ली: इंफेक्शन, डायबिटीज, हार्ट डिजीज आदि के इलाज के लिए आवश्यक लगभग 400 आवश्यक दवाओं की कीमतों में 1 अप्रैल से 1.74 फीसदी की बढ़ोतरी होगी. यह आवश्यक दवाओं की कीमतों में एक नियमित बदलाव है, जो हर साल किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे बाजार के साथ बनी रहें. बता दें कि सभी आवश्यक दवाओं की कीमतें सरकार के नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) तय करता है.
कीमतों में बढ़ोतरी क्यों की गई है?
सरकार की राष्ट्रीय आवश्यक दवाओं की सूची (NLEM) में सूचीबद्ध सभी दवाओं की कीमतों पर NPPA का सख्त नियंत्रण है. इसलिए हर साल पिछले साल के थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के अनुसार कीमतों में बदलाव किया जाता है. NPPA ने कहा गया है कि 2024 के कैलेंडर वर्ष के दौरान WPI में वार्षिक बदलाव 2023 की इसी अवधि की तुलना में (+) 1.74028 फीसदी के बराबर होगा… निर्माता इस WPI के आधार पर अनुसूचित योगों के अधिकतम खुदरा मूल्य में बढ़ोतरी कर सकते हैं. इस संबंध में सरकार की पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होगी.
एनएलईएम क्या है?
एनएलईएम को सरकार ने उन दवाओं को शामिल करने के लिए तैयार किया गया है जो अधिकांश आबादी की स्वास्थ्य संबंधी प्राथमिकताओं के लिए सबसे ज्यादा जरूरी हैं. इसमें वे दवाएं शामिल हैं जो भारत में सबसे आम बीमारियों के इलाज के लिए सबसे अच्छी और किफायती हैं.
भारत ने अपना पहला एनएलईएम 1996 में तैयार किया था, जिसे तब से चार बार संशोधित किया जा चुका है – 2003, 2011, 2015 और सबसे हाल ही में 2022 में. देश में बीमारियों की बदलती स्थिति, नई चिकित्सा पद्धतियों के उपलब्ध होने, या दवाओं के अप्रचलित होने या प्रतिबंधित होने को ध्यान में रखते हुए सूची को समय-समय पर संशोधित किया जाता है.













