14 जनवरी 2025 को देश ने विज्ञान और जलवायु जागरूकता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मोड़ देखा, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय मौसम विभाग (IMD) के 150वें स्थापना दिवस के अवसर पर नई पहल ‘मिशन मौसम’ (Mission Mausam) का औपचारिक शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम का आयोजन नई दिल्ली के भारत मंडपम में हुआ और इसे देश के मौसम विज्ञान तथा जलवायु-संतुलन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री ने इस मौके पर IMD के 150 साल की यात्रा का स्मरण करते हुए कहा कि यह केवल मौसम विभाग का दिन नहीं है, बल्कि यह भारत की वैज्ञानिक प्रगति तथा तकनीकी क्षमता का भी प्रतीक है, जिसने पिछले दशकों में हजारों नागरिकों की सुरक्षा, कृषि, आपदा प्रबंधन तथा मौसम-पूर्वानुमान जैसी सेवाओं को सशक्त बनाया है। PM Indiaमिशन मौसम का लक्ष्य भारत को *“वेदर-रेडी” (weather-ready) और “क्लाइमेट-स्मार्ट” राष्ट्र बनाना है, ताकि देश मौसम परिवर्तन, चरम मौसमी घटनाओं और जलवायु-संबंधी जोखिमों का सामना बेहतर तरीके से कर सके। इस पहल के तहत अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा, जिसमें उच्च-रिज़ॉल्यूशन वायुमंडलीय अवलोकन, अगली पीढ़ी के रडार, उपग्रह प्रौद्योगिकी और उन्नत कम्प्यूटिंग सिस्टम शामिल हैं, ताकि मौसम के पूर्वानुमान और चेतावनी प्रणाली को और अधिक सटीक बनाया जा सके। इसका उद्देश्य किसानों, मत्स्यकारों, आपदा प्रबंधन एजेंसियों और नागरिकों को समय पर चेतावनी देना है, जिससे उन्हें मौसम-संबंधी चुनौतियों से सुरक्षित बचने में मदद मिले। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि IMD ने पिछले 150 वर्षों में न केवल मौसम-पूर्वानुमान में उन्नति की है, बल्कि यह देश में कृषि, आपदा प्रबंधन, समुद्री और वायु यात्रा सुरक्षा तथा जलवायु परिवर्तन अनुकूलन जैसे क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने IMD के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और स्टाफ की तारीफ की और कहा कि अब देश को मौसम-संबंधी चुनौतियों के लिए अधिक तैयार और सजग बनाना हमारी राष्ट्रीय प्राथमिकता होनी चाहिए।













