नई दिल्ली: यात्रियों की बढ़ती संख्या से निपटने के लिए रेलवे लिंक हॉफमैन बुश (एलएचबी) कोचों को कई सुरक्षा सुविधाओं और क्षमता के साथ बढ़ाएगा, जिससे यात्रियों को आरामदायक यात्रा मुहैया की जा सके. इन रेलवे कोचों का डिजाइन हल्का है जिससे इनकी स्पीड बेहतर होती है और बैठने की क्षमता अधिक होती है.
इतना ही नहीं इस तरह के कोचों में एंटी क्लाइंबिंग अरेंजमेंट, एयर सस्पेंशन (सेकेंडरी) के साथ फेलियर इंडिकेशन सिस्टम होती है. पारंपरिक आईसीएफ कोचों की तुलना में इसमें कम कोरोसिव सेल्स होते हैं.
इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) चेन्नई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सुरक्षा सुविधाओं के बारे में विस्तार से बताते हुए ईटीवी भारत को बताया कि,पारंपरिक ICF कोचों की जगह LHB कोच लगाना रेलवे के विकास में एक बेहतर कदम है. एलएचबी कोचों को एंटी-टेलीस्कोपिक स्ट्रक्चर सुरक्षा सुविधाओं से लैस है टक्कर होने की स्थिति में आपको काफी हद तक सुरक्षित रखने में मददगार साबित होगा. इन कोचों में लगभग 80 लोगों के बैठने की क्षमता होगी.वहीं ICF कोचों में केवल 72 लोगों के बैठने की सुविधा होती है. इससे एक कोच में कम से कम 8 और लोगों के बैठने की क्षमता बढ़ जाती है.
आज कल सामान्य तौर पर यात्रियों की भारी भीड़ ट्रेनों में देखने को मिलती हैं. स्लीपर क्लास के कोचों में एक स्थान से दूसरे स्थान तक यात्रा करने पर लोगों को सही ढंग से कंफर्म टिकट नहीं मिल पाता है. इस कारण से उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. हालांकि, इन नए कोचों के ट्रेनों में शामिल हो जाने के बाद यात्रियों को काफी हद तक राहत मिलेगी.
अतिरिक्त कोच जोड़ने पर बात करते हुए उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शशिकांत त्रिपाठी ने ईटीवी भारत से कहा कि , नियमित ट्रेनों के साथ अतिरिक्त कोच जोड़ने से निश्चित रूप से यात्रियों को यात्रा के लिए अधिक विकल्प मिलेंगे एक ट्रेन में 22 कोच जोड़े जाएंगे, क्योंकि अधिकांश प्लेटफॉर्म 22 कोचों के रुकने के लिए बनाए गए हैं. अगर रेलवे अधिक कोच जोड़ेगा तो यात्रियों को प्लेटफॉर्म के सबसे अंत से ट्रेन में चढ़ने-उतरने में असुविधा का सामना करना पड़ेगा. इसलिए प्लेटफॉर्म के आकार के कारण रेलवे के पास कोच जोड़ने की सीमाएं हैं.
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि रेलवे को न केवल कोच बढ़ाने हैं, बल्कि त्योहारों,गर्मियों और सर्दियों के मौसम में यात्रियों की संख्या को देखते हुए ट्रेनों की संख्या में भी इजाफा करना है. इन एलएचबी कोचों में मजबूत कपलिंग सिस्टम होता है, जो ट्रेन को किसी भी दुर्घटना ,टक्कर जैसी आपात स्थिति में अधिक सुरक्षा प्रदान करता है. दुर्घटना के दौरान एक बोगी से दूसरी बोगी को आपस में टकराने, या एक दूसरे पर चढ़ने से ये मजबूत कपलिंग सिस्टम रोकता है.
कोच में एडवांस सस्पेंशन सिस्टम के कारण यात्री अधिक आराम का अनुभव कर सकते हैं,जिससे यात्रा आसान हो जाती है. ये अधिक गति से चलने में सक्षम होते हैं, जिससे यात्रा का समय कम होता है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये कोच यात्रियों के लिए जगहदार होते हैं. रेलवे अधिकारियों ने बताया कि पहले भी देखा गया है कि टक्कर के दौरान कई बोगियां एक-दूसरे पर चढ़ गईं, जिससे ट्रेनों के साथ-साथ यात्रियों को भी अधिक नुकसान हुआ.
रेलवे के अनुसार, ट्रेनों में यात्रियों की संख्या का पैटर्न पूरे साल एक जैसा नहीं रहता है और यह भीड़भाड़ और व्यस्त समय के दौरान अलग-अलग होता है. भीड़भाड़ वाले समय में, खास तौर पर लोकप्रिय रूटों पर ट्रेनों में भीड़भाड़ रहती है, जबकि व्यस्त समय और कम लोकप्रिय रूटों पर ट्रेनों का उपयोग कम होता है. रेलवे पर चलने वाली ट्रेनों के यातायात पैटर्न की नियमित आधार पर निगरानी की जाती है और अतिरिक्त मांग को पूरा करने के लिए मौजूदा ट्रेनों का भार बढ़ाया जाता है, विशेष ट्रेनें चलाई जाती हैं, नई ट्रेनें शुरू की जाती हैं और मौजूदा ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी बढ़ाई जाती है.
क्या कहता है रेलवे
जैसा कि रेलवे ने संसद को बताया, रेलवे ने पारंपरिक ICF कोचों की तुलना में बेहतर सवारी, बेहतर सौंदर्य और हल्के वजन वाले डिजाइन, एंटी क्लाइम्बिंग व्यवस्था, विफलता संकेत प्रणाली के साथ एयर सस्पेंशन (सेकेंडरी), कम संक्षारक शेल जैसी सुविधाओं के साथ तकनीकी रूप से बेहतर LHB कोचों का प्रसार किया है. पिछले कुछ सालों में LHB कोचों का उत्पादन लगातार बढ़ा है और दिसंबर 2024 तक 43495 से अधिक LHB कोचों का निर्माण किया जा चुका है. इसके अलावा, सभी ICF रेक को चरणों में LHB रेक से बदलने की योजना है. साथी ही, रेलवे ने बेहतर सुरक्षा सुविधाओं और आधुनिक यात्री सुविधाओं के साथ वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनें भी शुरू की हैं.
रेल मंत्री ने क्या कहा
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में चल रहे बजट सत्र में बताया कि जनरल और नॉन-एसी स्लीपर कोच का उपयोग करने वाले यात्रियों के लिए अधिक सुविधा प्रदान करने के लिए, मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों की संरचना के संबंध में मौजूदा नीति के तहत 22 कोचों वाली ट्रेन में 12 जनरल क्लास और स्लीपर क्लास नॉन-एसी कोच और 8 एसी कोच की व्यवस्था की गई है, जिससे जनरल और नॉन-एसी स्लीपर कोच का उपयोग करने वाले यात्रियों के लिए बेहतर सुविधा प्रदान की जा सके.
इंटीग्रल कोच फैक्ट्री, चेन्नई
साल 2024-25 के लिए, ICF ने पिछले वर्ष 2829 से बढ़कर 3007 कोच सफलतापूर्वक तैयार किए हैं. 3007 कोचों के उत्पादन में से, उल्लेखनीय रूप से 1169 डिस्ट्रीब्यूटेड पावर रोलिंग स्टॉक (DPRS) कोच हैं, जिसमें वंदे भारत स्लीपर, वंदे भारत चेयर कार, EMU और MEMU शामिल हैं, शेष 1,838 LBH कोच हैं.
डेटा क्या कहता है
अनारक्षित कोचों में अधिक यात्रियों को समायोजित करने के लिए, चालू वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों में लगभग 1,200 सामान्य श्रेणी के कोच एलएचबी कोच के साथ जोड़े गए हैं. नॉन-एसी कोचों से यात्रा करने वाले यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए, रेलवे ने 17,000 सामान्य श्रेणी/स्लीपर श्रेणी के कोच बनाने की योजना बनाई है.
अलग अलग प्रकार की नियमित ट्रेनों के अलावा, भारतीय रेलवे यात्रियों की अतिरिक्त जरूरतों को पूरा करने के लिए त्योहारों, छुट्टियों आदि के दौरान विशेष ट्रेन सेवाएं भी संचालित करता है.
वंदे भारत स्लीपर और अमृत भारत कोचों के उत्पादन की वर्तमान स्थिति और इन कोचों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में मंत्रालय ने बताया है कि वंदे भारत स्लीपर रेक का पहला रेक निर्मित हो चुका है और परीक्षण भी पूरा हो चुका है. वर्तमान में, रेक आईसीएफ, चेन्नई में अंतिम कमीशनिंग से गुजर रहा है.
अमृत भारत 2.0 का पहला रेक निर्मित हो चुका है और इसे वाणिज्यिक सेवाओं में डालने से पहले परीक्षण/परीक्षण के लिए भेजा जाएगा. वंदे भारत स्लीपर और अमृत भारत 2.0 के पहले प्रोटोटाइप रेक के सफल परीक्षणों और कमीशनिंग के बाद, इन रेक का श्रृंखलाबद्ध उत्पादन किया जाएगा, जिसके लिए विनिर्माण योजनाएं पहले से ही तैयार हैं.
कोच
वर्तमान में, ट्रेन सेवाओं को चलाने के लिए लगभग 79,000 कोचों का उपयोग किया जा रहा है, जनरल और नॉन-एसी स्लीपर (56,000) कुल एसी कोचों (23,000) का लगभग 70 प्रतिशत है.
अतिरिक्त कोच
यात्रियों के विभिन्न वर्गों के लिए अतिरिक्त सुविधा उपलब्ध कराने के लिए, मौजूदा ट्रेनों में स्थायी और अस्थायी आधार पर अतिरिक्त कोच भी जोड़े गए. पिछले दो वर्षों के दौरान स्थायी आधार पर 2024-25 (25 फरवरी तक) (983) और 2023-24 (872) अतिरिक्त कोच जोड़े गए हैं.













