श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और विधायक सज्जाद लोन ने जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी भाषी आबादी के खिलाफ आरक्षण प्रणाली में धांधली का आरोप लगाते हुए ‘क्षेत्रीय असमानता’ का मुद्दा उठाया है. लोन ने शनिवार को कहा कि जम्मू में अनुसूचित जाति से लेकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) तक सभी श्रेणियों में आरक्षण का बोलबाला है, जबकि घाटी में कश्मीरी भाषी निवासियों और अनुसूचित जनजाति के खिलाफ आरक्षण प्रणाली में धांधली की गई है.जम्मू-कश्मीर विधानसभा से मिले सवालों का जवाब देते हुए हंदवाड़ा के विधायक सज्जाद लोन ने कहा कि ‘सामाजिक पुनर्व्यवस्था’ के जरिये कश्मीरियों पर अन्य जातीय समूहों का सामाजिक वर्चस्व स्थापित करने की कोशिश की जा रही है
. उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में जम्मू में अनुसूचित जाति के लिए 67,112 आरक्षण प्रमाण पत्र जारी किए गए, लेकिन कश्मीर में एक भी नहीं.उन्होंने बताया कि जम्मू में अनुसूचित जनजाति के लिए 4,59,493 (85.3 प्रतिशत) आरक्षण प्रमाण पत्र जारी किए गए, जबकि कश्मीर में केवल 14 प्रतिशत यानि 79,813 प्रमाण पत्र जारी किए गए.लोन के अनुसार, कश्मीर में 2,273 के मुकाबले जम्मू में 27,430 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग EWS के प्रमाण पत्र जारी किए गए. इसका मतलब है कि घाटी में केवल 8 प्रतिशत ही EWS प्रमाण पत्र जारी किए गए. इसी तरह, जम्मू में रहने वाले लोगों के लिए 1,379 पिछड़े क्षेत्र के निवासी (आरबीए) प्रमाण पत्र जारी किए गए, जबकि कश्मीर में 1,229 आरबीए प्रमाण पत्र जारी किए गए.
लोन के अनुसार, कश्मीर में 16 के मुकाबले जम्मू में 268 वास्तविक नियंत्रण रेखा प्रमाण पत्र जारी किए गए. इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रहने वाले लोगों के लिए सभी 551 आरक्षण प्रमाण पत्र जम्मू में जारी किए गए, क्योंकि कश्मीर इस श्रेणी का हकदार नहीं है.गंभीर क्षेत्रीय असमानताउन्होंने कहा, “डेटा गंभीर क्षेत्रीय असमानता को दर्शाता है. मैं अकेले इस सरकार को दोष नहीं देता. लेकिन कांग्रेस और भाजपा और उनके लोगों की राष्ट्रीय नीति यही है कि कश्मीरी भाषी लोगों को सबक सिखाया जाए. कश्मीरी पंडितों को इसलिए भी बर्बाद किया जा रहा है क्योंकि वे भी कश्मीरी भाषी हैं या कश्मीर के निवासी हैं. यह 1989 से ही चल रहा है. उनके अनुसार, इन कदमों का उद्देश्य ‘कश्मीरियों पर अन्य जातीय समूहों का सामाजिक वर्चस्व’ स्थापित कàपुनर्व्यवस्था काम नहीं करेगी. हमें वर्चस्व की जरूरत नहीं है और न ही हम इसे पसंद करेंगे. हम लंबे समय से भाई की तरह रहते आए हैं और ऐसे ही रहेंगे.”पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष लोन ने आरक्षण के कारण कश्मीर को हुए नुकसान पर अध्ययन के लिए सेमिनार आयोजित करने की भी घोषणा की. उन्होंने कहा, “बहुत से लोग पढ़ाई के लिए (पाकिस्तान) गए
लेकिन उन्हें पासपोर्ट नहीं दिया गया. संघर्ष के बाद सरकारें शांति स्थापना के उपाय करती हैं लेकिन यहां स्थिति इसके उलट है. वे अनुकूल माहौल नहीं बना रहे हैं. वे हर जगह से हमें लूटने के लिए आतुर हैं.” उन्होंने चेतावनी दी कि कश्मीरी भाषी आबादी को वंचित करना विनाशकारी होगा.इस बीच, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने घोषणा की कि आरक्षण पर एक कैबिनेट उप-समिति छह महीने में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी. इससे पहले, लोन ने समिति के लिए समय सीमा की कमी का मुद्दा उठाया था.













