नई दिल्ली:–:शहर के कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले युवाओं में कम समय में बॉडी बनाने का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। सोशल मीडिया पर फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स, रील्स और जिम कल्चर के असर में युवा आकर्षक और मस्कुलर दिखने की चाह में शार्टकट अपनाने लगे हैं।
नियमित वर्कआउट और संतुलित खानपान की जगह प्रोटीन पाउडर, क्रिएटीन और अन्य सप्लीमेंट्स का सहारा लिया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह ट्रेंड धीरे-धीरे युवाओं की सेहत पर भारी पड़ रहा है। सप्लीमेंट्स का बढ़ता चलन जिम जाने वाले कई युवा बिना किसी मेडिकल जांच या डॉक्टर की सलाह के सप्लीमेंट्स लेना शुरू कर देते हैं।
शुरुआत में वजन और मसल्स बढ़ने का असर दिखता है, लेकिन कुछ ही समय में इसके साइड इफेक्ट सामने आने लगते हैं। किडनी पर अतिरिक्त दबाव, हार्मोनल असंतुलन, त्वचा संबंधी समस्याएं और हार्ट से जुड़ी दिक्कतें इसकी प्रमुख शिकायतें हैं।
छात्रों के अनुभव: जब फायदे की जगह नुकसान हुआ
न्यू मार्केट क्षेत्र में पढ़ने वाले एक कॉलेज छात्र अमन (21) ने बताया कि जिम ट्रेनर के कहने पर उन्होंने प्रोटीन पाउडर और क्रिएटीन लेना शुरू किया। शुरुआती दो महीनों में वजन बढ़ा, लेकिन इसके बाद चेहरे पर तेज रिएक्शन होने लगे। उनके चेहरे पर दाने और लाल चकत्ते निकल आए। डॉक्टर को दिखाया तो सप्लीमेंट्स तुरंत बंद करने को कहा गया।
इसी तरह, यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले रोहित (23) ने भी सोशल मीडिया देखकर सप्लीमेंट्स लेना शुरू किया। कुछ ही हफ्तों में उनके बॉडी पर दाने निकलने लगे। उन्हें लगा था बाडी बनेगी, लेकिन दाने इतनी बढ़ने लगे की काफी दिक्कत होले लगी और जलन भी हो रहा था। बाद में जांच में पता चला कि जरूरत से ज्यादा सप्लीमेंट लेने से शरीर पर रिएक्शन हो रहा था।
एक्सपर्ट्स की चेतावनी
विशेषज्ञों का कहना है कि बॉडी बनाना कोई जादू नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक और समय लेने वाली प्रक्रिया है। सही डाइट, पर्याप्त नींद और नियमित वर्कआउट से ही शरीर मजबूत बनता है। बिना जरूरत सप्लीमेंट्स लेने से शरीर के अंगों पर अनावश्यक दबाव पड़ता है। फिटनेस के नाम पर शार्टकट से बचें और धैर्य रखें।
नेचुरल डाइट ही सबसे सुरक्षित जिसमें दाल, दूध, दही, पनीर, फल और हरी सब्जियों से शरीर को पर्याप्त प्रोटीन और पोषक तत्व मिल जाते हैं। जरूरत से ज्यादा बाहरी सप्लीमेंट्स लेने की बजाय घर के खाने पर भरोसा करना ज्यादा सुरक्षित है। सही मात्रा में पोषण मिलने पर शरीर खुद-ब-खुद बेहतर शेप में आने लगता है।












