14 जनवरी 2025 को छत्तीसगढ़ में शिक्षा जगत एक बड़ी सामाजिक चर्चा का केंद्र बना रहा, जब राज्य भर के सैकड़ों सहायक शिक्षक (Assistant Teachers) ने अपनी नौकरी की वापसी की मांग के साथ प्रदर्शन और सत्याग्रह जारी रखा। यह आंदोलन उन शिक्षकों द्वारा चलाया जा रहा है जिनकी सेवाएं पिछले समय में सरकारी आदेश या उच्च न्यायालय के निर्णय के कारण समाप्त कर दी गई थीं, जिससे वे बेरोज़गार हो गये। इन शिक्षकों ने रायपुर के टुटा (Tuta) गांव में शीतल मौसम के बीच अपना विरोध जारी रखा और कहा कि वे अपने अधिकारों और रोजगार की गारंटी के लिये संघर्ष कर रहे हैं। �ThePrintप्रदर्शनकारी शिक्षकों ने बताया कि 28,000 से अधिक सहायक शिक्षकों को सरकारी नौकरियों से हटाया जा चुका है, जिससे उनके परिवारों का अस्तित्व मुश्किल में आ गया है। इन शिक्षकों के पास B.Ed (बैचलर ऑफ एजुकेशन) और अन्य आवश्यक योग्यताएँ हैं, लेकिन नौकरी की अस्थिर स्थिति ने उन्हें आर्थिक और मानसिक संकट में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले में शीघ्र निर्णय लेना चाहिए, ताकि उन्हें फिर से सरकारी सेवा में शामिल किया जा सके। �ThePrintस्थानीय लोगों का समर्थन भी इस आंदोलन के साथ जुड़ता दिखा। छात्रों के अभिभावकों और शिक्षण जगत से जुड़े अन्य व्यक्तियों ने भी कहा कि अगर बहाल किया जाए तो इन शिक्षकों का अनुभव और ज्ञान बच्चों के लिए फायदेमंद साबित होगा। कई लोग यह भी मानते हैं कि शिक्षकों की बहाली से स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार आएगा और बच्चों के शैक्षणिक परिणाम बेहतर होंगे।सरकार की प्रतिक्रिया में शिक्षा विभाग ने कहा कि इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और उच्च न्यायालय के आदेश, शिक्षा कर्मियों की स्थिति और भविष्य की भर्ती-नीति पर समग्र समीक्षा चल रही है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि जल्द ही सरकार एक समिति गठित करेगी, जिसमें सरकारी और शिक्षण संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे, ताकि इस मसले का स्थायी समाधान खोजा जा सके।विश्लेषकों का मानना है कि यह आंदोलन सिर्फ़ एक अधिकार की मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सुरक्षा, रोजगार की गारंटी और शिक्षा प्रणाली की मजबूती से जुड़ा बड़ा विषय भी है। उन्होंने कहा कि ऐसे आंदोलनों से सरकारी नीतियों में पारदर्शिता और सुधार की ज़रूरत स्पष्ट होती है।













