छत्तीसगढ़ राज्य न केवल अपनी सांस्कृतिक विविधता और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली भी बेहद प्रभावशाली है. आज भी कई गांवों में लोग आधुनिक दवाओं की बजाय जड़ी-बूटियों से इलाज को प्राथमिकता देते हैं. इन्हीं औषधीय पौधों में से एक आक है, जिसे आयुर्वेद में अत्यंत उपयोगी माना गया है.
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छत्तीसगढ़ राज्य न केवल अपनी सांस्कृतिक विविधता और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली भी बेहद प्रभावशाली है. आज भी कई गांवों में लोग आधुनिक दवाओं की बजाय जड़ी-बूटियों से इलाज को प्राथमिकता देते हैं. इन्हीं औषधीय पौधों में से एक आक है, जिसे आयुर्वेद में अत्यंत उपयोगी माना गया है.
डॉ. अनुज कुमार, जो आयुर्वेद के क्षेत्र में वर्षों से कार्यरत हैं, बताते हैं कि आक का पौधा अनेक रोगों के उपचार में सहायक होता है. इसकी पत्तियां, दूध और फूलों में औषधीय गुण होते हैं, जो विशेष रूप से त्वचा रोग, गठिया, श्वसन समस्याएं और बवासीर जैसे रोगों में उपयोगी होते हैं.
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डॉ. अनुज कुमार, जो आयुर्वेद के क्षेत्र में वर्षों से कार्यरत हैं, बताते हैं कि आक का पौधा अनेक रोगों के उपचार में सहायक होता है. इसकी पत्तियां, दूध और फूलों में औषधीय गुण होते हैं, जो विशेष रूप से त्वचा रोग, गठिया, श्वसन समस्याएं और बवासीर जैसे रोगों में उपयोगी होते हैं.
डॉ. अनुज के अनुसार, आक के दूध में प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो सूजन और संक्रमण को कम करने में मदद करते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि छत्तीसगढ़ के कई ग्रामीण चिकित्सक इसका उपयोग दांत दर्द, फोड़े-फुंसी और पुराने घावों को भरने के लिए करते हैं.
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डॉ. अनुज के अनुसार, आक के दूध में प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो सूजन और संक्रमण को कम करने में मदद करते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि छत्तीसगढ़ के कई ग्रामीण चिकित्सक इसका उपयोग दांत दर्द, फोड़े-फुंसी और पुराने घावों को भरने के लिए करते हैं.
छत्तीसगढ़ के बस्तर, सरगुजा और कांकेर जैसे क्षेत्रों में आज भी पारंपरिक वैद्य जड़ी-बूटियों का गहन अध्ययन करते हैं और उनके जरिए लोगों का इलाज करते हैं. कई आदिवासी समुदायों के पास पीढ़ियों से प्राप्त ज्ञान है, जिसे वे सुरक्षित रखे हुए हैं.
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छत्तीसगढ़ के बस्तर, सरगुजा और कांकेर जैसे क्षेत्रों में आज भी पारंपरिक वैद्य जड़ी-बूटियों का गहन अध्ययन करते हैं और उनके जरिए लोगों का इलाज करते हैं. कई आदिवासी समुदायों के पास पीढ़ियों से प्राप्त ज्ञान है, जिसे वे सुरक्षित रखे हुए हैं.
इसके अलावा, आक के पत्तों को गरम कर जोड़ों के दर्द पर बांधने से राहत मिलती है. वहीं, इसके फूलों का उपयोग आयुर्वेदिक दवाओं में किया जाता है, जो पाचन तंत्र को सुधारने और शरीर को ऊर्जा देने में सहायक होते हैं.
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इसके अलावा, आक के पत्तों को गरम कर जोड़ों के दर्द पर बांधने से राहत मिलती है. वहीं, इसके फूलों का उपयोग आयुर्वेदिक दवाओं में किया जाता है, जो पाचन तंत्र को सुधारने और शरीर को ऊर्जा देने में सहायक होते हैं.
हालांकि, डॉ. अनुज कुमार यह भी चेतावनी देते हैं कि आक एक विषैला पौधा भी हो सकता है, यदि इसका उपयोग सही मात्रा और विधि से न किया जाए. इसलिए इसके उपयोग से पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह लेना अनिवार्य है.
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हालांकि, डॉ. अनुज कुमार यह भी चेतावनी देते हैं कि आक एक विषैला पौधा भी हो सकता है, यदि इसका उपयोग सही मात्रा और विधि से न किया जाए. इसलिए इसके उपयोग से पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह लेना अनिवार्य है.
आक के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में कई अन्य औषधीय पौधे भी पाए जाते हैं, जैसे अश्वगंधा, गिलोय, तुलसी और सर्पगंधा, जो शरीर को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ रखने में मदद करते हैं. पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के समन्वय से छत्तीसगढ़ की यह चिकित्सा पद्धति देश और दुनिया के लिए एक मिसाल बन सकती है.
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आक के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में कई अन्य औषधीय पौधे भी पाए जाते हैं, जैसे अश्वगंधा, गिलोय, तुलसी और सर्पगंधा, जो शरीर को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ रखने में मदद करते हैं. पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के समन्वय से छत्तीसगढ़ की यह चिकित्सा पद्धति देश और दुनिया के लिए एक मिसाल बन सकती है.













