नई दिल्ली: भारत सरकार ने घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और चीन पर निर्भरता कम करने के लिए शुरू की गई 23 बिलियन डॉलर की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना को बंद करने का फैसला किया है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार भाग लेने वाली फर्मों के अनुरोध के बावजूद इस स्कीम को शुरुआती 14 क्षेत्रों से आगे नहीं बढ़ाया जाएगा, न ही प्रोडक्शन की समयसीमा बढ़ाई जाएगी.एप्पल सप्लायर फॉक्सकॉन और रिलायंस इंडस्ट्रीज सहित लगभग 750 कंपनियों ने इस योजना के लिए साइन अप किया, इसमें प्रोडक्शन लक्ष्य पूरा करने के लिए नकद प्रोत्साहन का वादा किया गया था. हालांकि कई कंपनियां प्रोडक्शन शुरू करने में फेल रहीं, जबकि अन्य को सब्सिडी भुगतान में देरी का सामना करना पड़ा.अक्टूबर 2024 तक फर्मों ने निर्धारित लक्ष्य का केवल 37 फीसदी हासिल किया था, जिसमें केवल 1.73 बिलियन डॉलर आवंटित पैसे का 8 फीसदी से भी कम – वितरित किया गया था.
आजमाइश के बावजूद विनिर्माण में गिरावटपीएलआई योजना का लक्ष्य भारत की अर्थव्यवस्था में विनिर्माण की हिस्सेदारी को 2025 तक 25 फीसदी तक बढ़ाना था. लेकिन इसके बजाय यह 15.4 फीसदी से घटकर 14.3 फीसदी रह गई है. सरकार ने इस फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं की है, और फॉक्सकॉन और रिलायंस जैसे प्रमुख लाभार्थी चुप रहे हैं.कुछ क्षेत्रों में सफलता, अन्य में संघर्षफार्मास्यूटिकल्स और मोबाइल फोन जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई. अप्रैल और अक्टूबर 2024 के बीच जारी किए गए प्रोत्साहनों में से 94 फीसदी प्राप्त हुए. खाद्य प्रसंस्करण जैसे अन्य क्षेत्र निवेश और विकास मानदंडों को पूरा करने में विफल रहे, जिससे सब्सिडी नहीं मिल पाई.
नए प्रोत्साहन मॉडल पर काम चल रहापीएलआई की कमियों के बावजूद सरकार विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है. अधिकारी अब एक नए मॉडल पर विचार कर रहे हैं जो कंपनियों को प्लांट सेटअप लागतों की प्रतिपूर्ति करेगा, जिससे उन्हें उत्पादन-आधारित प्रोत्साहनों की प्रतीक्षा करने के बजाय निवेश को तेजी से वसूलने में मदद मिलेगी.













