नई दिल्ली:– महाराष्ट्र में डिप्टी सीएम अजित पवार की मृत्यु के बाद भाजपा के लिए बिगड़ सकने वाले राजनीतिक संतुलन को दुरूस्त करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्वयं कमान संभाल ली है। यह कहा जा रहा है कि इसी वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनको अजित पवार के अंतिम संस्कार में जाने का दायित्व दिया।
उनके साथ भाजपा के नव-निर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी थे। यह कहा जा रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उनके साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की बारामती में अजित पवार के अंतिम संस्कार में उपस्थिति ने यह साफ कर दिया है कि महाराष्ट्र भाजपा के लिए रणनीतिक रूप से कितना महत्वपूर्ण है।
अजित की मृत्यु के बाद बदले समीकरण
सूत्रों के मुताबिक भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का लक्ष्य है कि वह अगले एक सप्ताह के अंदर महाराष्ट्र के अंदर अपने लिए स्थिति उसी तरह सहज कर ले, जिस तरह से अजित पवार के जीवित रहते हुए था। उस समय एकनाथ शिंदे पर दबाव बनाने और उनकी ओर से किसी भी तरह के मोल-भाव की स्थिति को रोकने के लिए भाजपा के पास एक संतुलन शक्ति के रूप में अजित पवार थे।
लेकिन यह कहा जा रहा है कि अजित पवार की मृत्यु के बाद एकनाथ शिंदे एक बार फिर से परोक्ष या प्रत्यक्ष रूप से भाजपा के सामने अपनी ताकत दिखाने का कार्य कर सकते हैं। यह भी आशंका जाहिर की जा रही है कि अगर सरकार में शिवसेना एकनाथ शिंदे गुट को तव्वजों नहीं मिली तो उनके कुछ विधायक वापस शिवसेना यूबीटी की ओर आकर्षित हो सकते हैं।
राज्यसभा में सुनेत्रा पवार को लाने की तैयारी
यही नहीं, भाजपा नेतृत्व का यह भी मानना है कि अजित नीत एनसीपी के कुछ विधायक भी वापस एनसीपी (एसपी) की ओर झुकाव दिखा सकते हैं। ऐसा होने पर भाजपा के लिए महाराष्ट्र की सरकार चलाने में समस्या हो सकती है, जिससे निपटने के लिए भाजपा की पहली प्राथमिकता एनसीपी अजित पवार गुट की ताकत को पहले की तरह बनाए रखना है। इसे ध्यान में रखते हुए भाजपा नेतृत्व उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को राज्य विधानसभा में लाना चाहती है। भाजपा का एक वर्ग उनको डिप्टी सीएम भी बनाने का पक्षधर है।













