मध्यप्रदेश:- हर मां-बाप अपने बच्चों को अच्छा इंसान बनाना चाहते हैं. वो चाहते हैं कि हमारा बच्चा पढ़-लिखकर एक बेहतर जिंदगी जिए. सही रास्ते पर चलकर अपना और अपने परिवार का नाम रौशन करे. लेकिन अक्सर हमारे बच्चे सही रास्ता चुनने के बजाय गलत रास्ता चुन लेते हैं. अगर उनके साथ कुछ गलत होता भी है तो वो अपने मां-बाप से कहने में झिझकते हैं. ऐसे में मां-बाप क्या करें ये बड़ा सवाल होता है. तो चलिए आपके सवालों के जवाब ढूंढते हैं. बच्चों के विकास की नींव उनके बचपन में ही रख दी जाती है. ऐसे में हर मां-बाप को बचपन से अपने बच्चों के जीवन में इस प्रकार के कुछ सकारात्मक शब्दों को शामिल करना चाहिए. जिससे आप उन्हें विनम्र बना सकते हैं. उनके व्यक्तित्व को आकर्षक बना सकते हैं. साथ ही उन्हें एक अच्छा इंसान बना सकते हैं.
अक्सर देखा गया है कि बच्चे वही सीखते और करते हैं जो वो लगातार अपने आस-पास या मां-बाप को करता हुआ देखते हैं. ऐसे में अगर हम बचपन में ही उनके जीवन में कुछ खास शब्दों को जोड़ दें तो बच्चों के अंदर शिष्टाचार विकसित होगा. यहां हैं ऐसी 5 बातें जो अगर आप अपने बच्चे से कहेंगे तो किसी मंत्र की तरह असर करेंगी और बच्चों को शांत और समझदार बनाएंगी.
हर मां-बाप के लिए जरूरी है अपने बच्चों के लिए उदाहरण बनना. इस लिए अगर आप अपने बच्चों से कोई वादा करते हैं, तो अपनी बात पर कायम रहें. जिससे आपका बच्चा आपकी तारीफ करेगा और आप पर भरोसा करेगा. इस वाकये से वो सीखेगा कि अपनी बात पर कायम रहना चाहिए. इससे भरोसा बनता है.
2- मुझे तुम पर गर्व है
सभी बच्चे ये सुनना चाहते हैं कि उनके मां-बाप उन पर गर्व करते हैं. अपने बच्चों के विकास पर नजर रखें. उनके आगे बढ़ने के प्रयास की सराहना करें. अपने बच्चों को एहसास दिलाएं कि आपको उनके अच्छे प्रयास और उन पर गर्व है. जिससे वो अगली बार दुगनी ताकत से प्रयास करें.
बच्चों को दी गई सलाह
चेतावनी और धमकियां लंबे समय तक बच्चों पर काम नहीं करती. एक युवा अगर कुछ करता है और फिर उसमें फेल हो जाता है तो वो बुरा महसूस करता है. ऐसे में आपकी एक बेहतर और दोस्ताना सलाह उसके अंदर फिर उत्साह भरती है. बच्चों से अगर कोई गलती हो जाती है तो उन्हें चेतावनी और धमकी देने के बजाय उन्हें पास में बैठाकर सही गलत का फर्क बताएं और उनके परिणाम भी. जिससे वो ऐसे फैसले ले सकता है जो आपको भी मंजूर हो.
4-‘मुझे तुम्हारा मां-बाप बनना पसंद है’
हर बच्चा एक अनमोल खजाना है. अपने बच्चों को प्यार का एहसास कराएं. उन्हें बताएं कि आपको उनके पैदा होने पर और उनको बड़ा करते वक्त कितनी खुशी मिली. जिससे उनके व्यवहार पर सकारात्मक असर पड़े. लेकिन ज्यादातर मां-बाप बच्चों के पालन-पोषण में आने वाली कठिनाइयों का रोना रोते रहते हैं. जिससे बच्चों को चिढ़ होती है और उनके अंदर हीन भावना पैदा होती है. ऐसे हमें बच्चों के प्रति अपना प्यार और आभार व्यक्त करना चाहिए.
मुझे माफ कर दो’
सबसे खास बात यही है. हम अपने बच्चों से कभी भी अपनी गलतियों के लिए माफी नहीं मांगते. हमें लगता है कि अगर हम गलती की माफी मांगेंगे तो हम बच्चों के सामने कमजोर दिखेंगे या फिर सम्मान खो देंगे. लेकिन ऐसा नहीं है. अगर आप बच्चों से गलती के लिए माफी नहीं मांगते तो वो भी इससे यही सीखते हैं. उन्हें लगता है कि बड़े गलती कर सकते हैं. ऐसे में अगर आप अपनी गलती की माफी मांगते हैं तो उनके अंदर भी ये भावना पैदा होगी और वो एक बेहतर इंसान बन पाएंगे. ऐसा इंसान जो अपनी गलती पर माफी मांग सकता है. वो इंसान अपनी गलतियां सुधार भी सकता है।











