तिरुवल्लूर: तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले के उथुकोट्टई तालुका अंतर्गत आने वाले ईसानम कुप्पम में किसान जालंधर पिछले 40 सालों से करीब 15 एकड़ में रेगिस्तानी गुलाब (एडेनियम) के पौधे उगाकर बेच रहे हैं. जालंधर लगातार मेहनत करके हर साल 60 लाख रुपए तक की आमदनी कर रहे हैं. जालंधर को ये मुनाफा 20 साल बाद होना शुरू हुआ है.किसान जालंधर ने बताया कि साल 1986 में शुरू हुए इस बगीचे में सिर्फ रेगिस्तानी गुलाब के पौधे ही बिकते हैं. कुल 450 तरह के पौधों में से हर पौधे पर तीन तरह के फूल खिलते हैं. छोटी जड़ों वाले पौधे 150 रुपए से शुरू होते हैं और मोटी जड़ों वाले पौधे 12 लाख रुपए तक में बिकते हैं. उन्होंने कहा कि रेगिस्तानी गुलाब के ये पौधे दुनिया में सिर्फ तीन जगह चेन्नई, वियतनाम और थाईलैंड में मिलते हैं
रेगिस्तानी गुलाब के पौधे ।किसान जालंधर ने बताया कि खासतौर पर ज्यादा ऊंचाई और मोटी जड़ों वाले पौधे जो 12 लाख रुपए तक में बिकते हैं, सिर्फ यहीं मिलते हैं. इन पौधों को बनाए रखने के लिए उन्हें सप्ताह में दो बार पानी देना ही काफी है. खाद की कोई जरूरत नहीं है. आपको बस उन्हें धूप में रखना है. ये पौधे बर्फीले क्षेत्रों को छोड़कर सभी जगहों पर उग सकते हैं. उन्होंने बताया कि इस पौधे की कीमत साल दर साल बढ़ती जाती है.किसान जालंधर ने बताया कि पौधों की ग्राफ्टिंग करने से एक ही पौधे पर कई रंग-बिरंगे फूल खिलते हैं. कीमत थोड़ी ज़्यादा मिलती है. मैं जो पौधे तैयार करता हूं, वे केरल, गुजरात और दिल्ली जैसे राज्यों में बड़ी मात्रा में बिकते हैं. पौधे ज्यादातर दुबई जैसे अरब देशों में बेचे जाते हैं. उन्होंने कहा कि हमारे बगीचे में काम करने वाले मजदूर इन पौधों को अच्छी तरह से विकसित करके हमारी बहुत मदद कर रहे हैं. मेरी तरक्की का मुख्य कारण मेरे मजदूर हैं.
किसान जालंधर ने बताया कि अगर आप इन रेगिस्तानी गुलाब के पौधों को उखाड़कर धूप में रख दें, तो ये दो महीने में अंकुरित हो जाएंगे. ये ऐसे पौधे हैं, जो जल्दी मुरझाते नहीं हैं और यह उन खूबसूरत पौधों में से एक है, जिन्हें बहुत अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती है. उन्होंने कहा कि मुझे राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत तमिलनाडु बागवानी विभाग द्वारा 10.65 लाख रुपए की सब्सिडी पर 3,000 वर्ग मीटर की एक शेड नेट हट दी गई थी. इससे मुझे पौधे उगाने में बहुत मदद मिली. विजिटर्स को 15 एकड़ के रेगिस्तानी गुलाब उद्यान का दौरा करने की अनुमति देने की व्यवस्था जल्द ही की जा रही है.













