कांकेर : हर साल 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है ताकि घरों में चहकने वाली इन नन्हीं चिड़ियों की घटती आबादी को लेकर जागरूकता फैलाई जा सके. गौरेया के संरक्षण के लिए कदम उठाए जा रहे हैं. कांकेर नगर भी इससे अछूता नहीं है. यहां की सखी संगिनी वुमेन्स क्लब पिछले 10 सालों से गौरैया चहचहाहट को बरकरार रखने के लिए अभियान चला रही है.
सखी संगिनी वुमेन्स क्लब ने अपने अभियान के बारे में जानकारी दी.सकोरा बांटकर चिड़ियों को बचाने की कोशिश : वुमेन्स क्लब से जुड़ी महिला रीना लारिया ने बताया कि पिछले 10 साल से गर्मी के दिनों में मिट्टी के बर्तन का पात्र सकोरा बनवाते हैं.इसके बाद इन्हें पेड़ों में बांधते हैं. जितने भी घनी आबादी वाले क्षेत्र हैं जहां गौरेया आती है वहां सकोरा बांधकर लोगों से पानी डालने की अपील करते हैं. वुमेन्स क्लब से जुड़ी एक अन्य महिला विजय लक्ष्मी कौशिक की माने तो उनका क्लब पिछले 10 साल से इस अभियान को आगे बढ़ा रहा है.
महिलाओं ने उठाया चिड़ियों को बचाने का बीड़ा )हम निरंतर 10 सालों से इस तरह सकोरा पेड़ों में बांध रहे हैं. बांध ही नहीं रहे बल्कि लोगों को बांटते भी है ताकि लोग अपने घरों , बालकनी में इसे स्वयं से बांधे क्योकि गर्मी के दिनों में पानी कि समस्या रहती है. इसे बांधने से चिड़ियों को पानी की कमी नही होगी. आज गौरेया दिवस के दिन भी हम लोग लोगो को जागरूक कर रहे हैं – विजय लक्ष्मी कौशिक, सदस्य, सखी संगिनी वूमेन्स क्लब
विलुप्त होती जा रही है गौरेया : गौरतलब है कि कांकेर नगर चारों तरफ पहाड़ों से घिरा हुआ है. गौरेया की संख्या काफी है इसे लेकर वुमेन्स क्लब की महिला ज्योत्सना गुप्ता और पद्मनी साहू कहती है पहले की अपेक्षा अब गौरेया की संख्या कांकेर में घट रही है यहीं कारण से हम जनजागरूकता अभियान चला रहे हैं ताकि लोग जागरूक होकर कम से कम पानी के पात्र घरों के बाहर बांधे. गांव की शांत सुबह से लेकर शहरों की व्यस्त गलियों तक, कभी गौरैया की चहचहाहट आम बात थी. ये नन्हीं चिड़ियां घरों, मंदिरों और पेड़ों में बसेरा करती थीं.लेकिन समय के साथ, इनकी संख्या तेजी से घटती गई और अब यह एक दुर्लभ दृश्य बन चुकी हैं.













