नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 16 जनवरी 2025 को केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के वेतन में संशोधन के लिए 8वें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दी थी. कई रिपोर्टों के अनुसार नेशनल काउंसिल- ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने कम से कम 2.57 (जो कि 7वें वेतन आयोग के समान है) या उससे अधिक के फिटमेंट फैक्टर की मांग की थी.सातवें वेतन आयोग में 2.57 फिटमेंट फैक्टर के कारण वेतन और पेंशन में 157 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जिससे केंद्रीय कर्माचारियों की न्यूनतम सैलरी 7,000 से बढ़कर 18,000 रूपये हो गया।फिटमेंट फैक्टर क्या है?फिटमेंट फैक्टर मल्टीप्लिकेशन यूनिट को संदर्भित करता है, जिसका इस्तेमाल सरकारी कर्मचारियों के मूल वेतन और पेंशन को संशोधित करने के लिए किया जाता है
. उदाहरण के लिए 2.57 के फिटमेंट फैक्टर का मतलब 257 प्रतिशत वेतन वृद्धि है. नतीजतन वर्तमान न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये प्रति माह बढ़कर 46,260 रुपये हो जाएगा. यहां तक कि 9,000 प्रति माह की न्यूनतम पेंशन भी बढ़कर 23,130 हो जाएगी.माना जा रहा है कि 8वें वेतन आयोग में 1.92 फिटमेंट फैक्टर लागू हो सकता है. हालांकि, ऐसा हो जाता है, तो इससे केंद्र सरकार के कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 18,000 से बढ़कर 34,560 हो जाएगा, जो कि 92 प्रतिशत की बढ़ोतरी है.कम से कम कितना होना चाहिए फिटमेंट फैक्टर?इसके बावजूद नेशनल काउंसिल-ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी के सचिव (कर्मचारी पक्ष) शिव गोपाल मिश्रा ने NDTV प्रॉफिट को बताया कि उनका मानना है कि फिटमेंट फैक्टर कम से कम 2.57 या उससे अधिक होना चाहिए.
क्योंकि इसकी गणना करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले मानदंड पुराने हो चुके हैं और वर्तमान समय के कर्मचारियों की जरूरतों को नहीं दर्शाते हैं.रिपोर्ट के अनुसार विशेष रूप से 7वें वेतन आयोग ने 1957 के 15वें भारतीय श्रम सम्मेलन (ILC) के प्रस्ताव और न्यूनतम जीवनयापन वेतन के लिए डॉ. एक्रोयड के फॉर्मूले के आधार पर फिटमेंट फैक्टर को 2.57 पर सेट किया था, जो केवल आवश्यक वस्तुओं के लिए है और इंटरनेट जैसे आधुनिक खर्चों के लिए नहीं. बता दें कि 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू हो सकता है. हालांकि, ऐसी भी अटकलें हैं कि इसमें देरी हो सकती है और इसमें ज्यादा समय लग सकता है.












