मध्यप्रदेश:- किसी भी तरह की तकलीफ, सांस लेने में मुश्किल या अस्पष्ट दर्द जैसे छोटे-छोटे संकेतों को अनदेखा नहीं करना चाहिए.
आजकल हमारा लाइफस्टाइल भी काफी खराब होता जा रहा है. बाहर के खान-पान की आदतें, काम का ज्यादा तनाव, शारीरिक गतिविधि की कमी और धूम्रपान से भी युवाओं में हृदय संबंधी समस्याएं बढ़ती हैं. कुछ लोगों में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल भी हृदय रोग का कारण हो सकता है. इसके अलावा अगर परिवार में पहले किसी को हृदय रोग हुआ है तो भी कम उम्र में हार्ट समस्या की संभावना काफी बढ़ जाती है.
स्पेन में हाल ही में एक रिसर्च से पता चला है कि सुबह-सुबह हार्ट अटैक ज्यादा आते हैं. अक्सर सुबह 6 बजे से दोपहर तक हार्ट अटैक का खतरा सबसे ज्यादा होता है.
कोविड से पहले भी युवाओं में हार्ट अटैक के मामले आते थे?
नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डॉ ओपी यादव ने बीबीसी को बताया, दो या तीन दशक पहले 40 से कम उम्र के सिर्फ 10 फीसदी लोगों में ही हार्ट अटैक के मामले देखने को मिलते थे. डॉ ओपी का कहना है कि युवाओं को पहले भी हार्ट अटैक आता था. हाल ही में कुछ सेलिब्रिटी की हार्ट अटैक से मौत की खबर आने के बाद इसकी चर्चा काफी बढ़ गई. ये कहा जाने लगा कि युवाओं में हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं.
डॉ ओपी का कहना है कि हार्ट अटैक से किसी व्यक्ति की मौत होने पर इसका भी आंकलन किया जाना चाहिए कि उनका पिछला प्रोफाइल कैसा था. क्या उन्हें पहले कुछ डायबीटिज, हाइपरटेंशन, मोटापा जैसी कोई समस्या थी।











