मध्यप्रदेश:– भारत में सोना न सिर्फ गहना बल्कि सेविंग और इन्वेस्टमेंट का अहम जरिया माना जाता है। लगभग हर परिवार में खानदानी गहने पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ते हैं। लोग इन्हें यादों और इमोशन्स से जोड़कर भी देखते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इन गहनों पर इनकम टैक्स एक्ट के तहत खास नियम बने हुए हैं।
विरासत में मिले गहनों पर टैक्स नहीं
अगर आपको अपनी मां-पिता या दादा-दादी से सोने की ज्वैलरी मिली है, तो इसे सिर्फ रखने पर कोई टैक्स नहीं लगता। इनकम टैक्स एक्ट की धारा 56(2)(x) और धारा 47(iii) के मुताबिक, ऐसे तोहफे या विरासत में मिले गहनों को आपकी आय नहीं माना जाता।
बेचने पर देना होगा टैक्स
टैक्स की समस्या तब आती है जब आप इन गहनों को बेचते हैं। उस समय जो मुनाफा (Profit) होता है, उसे कैपिटल गेन माना जाता है और उसी पर टैक्स देना होता है। टैक्स पूरे गहनों की कीमत पर नहीं बल्कि सिर्फ उस प्रॉफिट पर लगता है।
टैक्स कैलकुलेशन कैसे होता है?
अगर गहना 1 अप्रैल 2001 से पहले खरीदा गया था, तो उस समय का Fair Market Value लिया जाएगा।
इस कॉस्ट को Cost Inflation Index से एडजस्ट किया जाता है ताकि महंगाई का असर जोड़ा जा सके।
नया टैक्स नियम जुलाई 2024 से लागू
24 महीने तक रखने पर: गहना बेचने पर होने वाला मुनाफा शॉर्ट टर्म गेन माना जाएगा और टैक्स आपकी इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से लगेगा।
24 महीने से ज्यादा रखने पर: इसे लॉन्ग टर्म गेन माना जाएगा और टैक्स 12.5% फ्लैट रेट से देना होगा। अब इंडेक्सेशन का फायदा नहीं मिलेगा।
टैक्स से छूट कैसे मिलेगी?
अगर आप Section 54F के तहत गहनों को बेचकर पूरा पैसा किसी घर की प्रॉपर्टी में लगाते हैं, तो टैक्स से राहत मिल सकती है। हालांकि यह छूट कुछ शर्तों के साथ ही लागू होगी।













