नई दिल्ली: सरकार मछली पालन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी में है. विशेष आर्थिक क्षेत्रों (Exclusive Economic Zone) में मत्स्य पालन को संगठित और सुरक्षित बनाने के लिए नए दिशानिर्देश तैयार किए जा रहे हैं, जिससे तटीय मछुआरों को बेहतर संसाधन मिलेंगे और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन भी बना रहेगा. यह कदम न केवल उनकी आजीविका को सशक्त करेगा, बल्कि देश में सतत मत्स्य पालन को भी नई दिशा देगा
.अंतर-मंत्रालयी समिति का गठनः मत्स्य विभाग ने ईईजेड और समुद्र में मछली पकड़ने के लिए दिशा-निर्देशों का मसौदा तैयार करने के लिए अंतर-मंत्रालयी समिति का गठन किया है. मत्स्य विभाग ने कृषि, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण पर संसद की स्थायी समिति को दिए अपने जवाब में बताया कि समिति की पिछले महीने फरवरी में दो बैठकें हो चुकी हैं. संसदीय समिति ने मत्स्य पालन विभाग द्वारा विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) और उच्च समुद्र में सतत मत्स्य पालन के संबंध में उठाए जा रहे कदमों के बारे में पूछा
मत्स्य पालन को बढ़ावाः मत्स्य पालन विभाग ने कहा कि अंडमान एवं निकोबार तथा लक्षद्वीप द्वीपसमूह में मत्स्य पालन के विकास के लिए सांकेतिक बजटीय आवश्यकताओं के साथ रणनीतिक कार्य योजना तैयार की जा रही है. इसके अलावा, मत्स्य पालन विभाग ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत जलवायु परिवर्तन से प्रभावित समुदायों की आर्थिक क्षमता बढ़ाने के लिए समुद्र तट के निकट स्थित 100 तटीय मछुआरा गांवों को जलवायु अनुकूल तटीय मछुआरा गांवों के रूप में चिन्हित किया है.
मत्स्य पालन की संभावनाएंः देश में अंतर्देशीय मत्स्य पालन की अपार संभावनाएं हैं. 0.28 मिलियन किलोमीटर लंबी नदियां और नहरें हैं. 1.2 मिलियन हेक्टेयर बाढ़ के मैदान की झीलें, 2.45 मिलियन हेक्टेयर तालाब और टैंक तथा 3.15 मिलियन हेक्टेयर जलाशय शामिल हैं. ये सब कुल मछली उत्पादन में लगभग 13.9 एमएमटी का योगदान देते हैं. अधिकांश पारंपरिक मछली पकड़ने वाले समुदाय, जिनके पास सामाजिक-आर्थिक स्थिरता का अभाव है, इन विशाल नदियों और झीलों के आसपास रहते हैं.
क्या है विशेष आर्थिक क्षेत्र: मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने कहा कि बजट 2025-26 में विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) और उच्च समुद्र (किसी भी देश के राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र से परे पाए जाने वाले विशाल खुले महासागर और गहरे समुद्र तल के क्षेत्र) से मत्स्य पालन के सतत दोहन के लिए एक रूपरेखा को सक्षम करने पर जोर दिया गया है. लक्षद्वीप और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर विशेष ध्यान दिया गया है.समुद्री मत्स्य पालन पर राष्ट्रीय नीति: मंत्रालय के अनुसार, सरकार ने एनपीएमएफ 2017 पेश किया है, जो सभी समुद्री मत्स्य पालन कार्यों के लिए मुख्य सिद्धांत के रूप में स्थिरता पर फिर से ज़ोर देता है. यह नीति भारत के समुद्री मत्स्य संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन का मार्गदर्शन करती है
.विनियमन और संरक्षण उपाय: समुद्री मछली स्टॉक की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए, सरकार ने कई संरक्षण उपायों को लागू किया है. जिसमें मानसून के दौरान ईईजेड में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध, विनाशकारी मछली पकड़ने के तरीकों पर रोक, सतत प्रथाओं को बढ़ावा देना और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा मत्स्य पालन विनियमन शामिल हैं.
वैश्विक मछली उत्पादन: भारत, मछली उत्पादन में लगभग 8 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है. मंत्रालय ने हाल ही में कहा कि पिछले दो दशकों में, भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र ने तकनीकी प्रगति से लेकर नीतिगत सुधारों तक विकास और परिवर्तन देखा है.













