नई दिल्ली: चीन ने 4 अप्रैल को सभी अमेरिकी वस्तुओं पर 10 अप्रैल से 34 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ वृद्धि की घोषणा की, क्योंकि वाशिंगटन ने चीनी उत्पादों पर नये शुल्क लगा दिये थे. चीनी अधिकारियों ने कहा कि वे अमेरिका और भारत से आयातित मेडिकल सीटी एक्स-रे ट्यूबों की जांच शुरू करेंगे और दो अमेरिकी कंपनियों से पोल्ट्री उत्पादों के आयात पर रोक लगाएंगे.
अलग से चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि वह 11 अमेरिकी कंपनियों को अपनी अविश्वसनीय संस्थाओं की सूची में जोड़ रहा है, जो उन्हें चीन में या चीनी कंपनियों के साथ व्यापार करने से रोकती है. और मंत्रालय ने गैडोलीनियम और यिट्रियम सहित कुछ दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के निर्यात पर सख्त सीमाएं लगाईं, जिनका खनन लगभग विशेष रूप से चीन में किया जाता है और जिनका उपयोग इलेक्ट्रिक कारों से लेकर स्मार्ट बमों तक हर चीज में किया जाता है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सप्ताह की शुरुआत में चीन पर 54 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जिसमें पहले से लागू शुल्क भी शामिल हैं. इससे चीन अमेरिका की टैरिफ सूची में सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में से एक बन गया है.
जनवरी में ट्रंप के व्हाइट हाउस में वापस आने के बाद से वाशिंगटन और बीजिंग के बीच तनाव और बढ़ गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने शपथग्रहण के दो महीने से अधिक समय बाद भी अपने चीनी समकक्ष से बात नहीं की है. वे अमेरिका में फेंटेनाइल के प्रवाह में चीन की कथित भूमिका को लेकर भी गतिरोध में फंसे हुए हैं, जिसे ट्रंप ने टैरिफ के पिछले दो दौर का कारण बताया था.









