12 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कवर्धा जिले के ग्राम घोटिया में नए मेडिकल कॉलेज का औपचारिक भूमिपूजन समारोह आयोजित किया, जो राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम के रूप में देखा जा रहा है। 306 करोड़ रुपये से विकसित होने वाली इस नई चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवा परियोजना का उद्देश्य न केवल उच्च-स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाओं को कवर्धा और आसपास के जिलों तक पहुँचाना है, बल्कि स्थानीय युवाओं को बेहतर मेडिकल शिक्षा और रोजगार का अवसर प्रदान करना भी है। मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि “स्वास्थ्य एक मौलिक अधिकार है” और वे चाहते हैं कि राज्य के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ उनके **नजदीकी क्षेत्र में ही सरल तरीके से उपलब्ध हों,” जिससे उन्हें बड़े शहरों का रुख़ न करना पड़े। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मेडिकल कॉलेज में आधुनिक-तकनीक, विशेषज्ञ चिकित्सक और अत्याधुनिक लैब सुविधाएँ उपलब्ध होंगी, जिससे डायग्नोस्टिक एवं उपचार दोनों स्तरों पर स्थानीय लोगों को राहत मिलेगी।सरकार ने इस परियोजना के लिए लगभग 40 एकड़ भूमि आवंटित की है, जहाँ चिकित्सा कक्ष, शिक्षण ब्लॉक, प्रयोगशालाएँ, हॉस्टल, पुस्तकालय और अध्ययन-केंद्र सहित सभी आवश्यक सुविधाएँ विकसित की जाएँगी। अधिकारियों के अनुसार, इस कॉलेज में प्रारंभिक क्षमताएँ 100 सीटों तक होंगी, जिनमें भविष्य में विस्तार की संभावनाएँ भी हैं। भर्ती प्रक्रिया में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने का वादा भी किया गया है ताकि ग्रामीण इलाकों के प्रतिभाशाली छात्रों को स्थानीय स्तर पर चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिले।कवर्धा के स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री साय की इस पहल का स्वागत किया और इसे “एक नए युग की शुरुआत” बताया। ग्रामीणों ने कहा कि इससे उनकी यात्रा-लागत में कमी आएगी, उच्च-स्तरीय चिकित्सा सहायता का लाभ समय पर मिल सकेगा और बच्चों के शिक्षा-विकास में नई दिशा आएगी। विशेष रूप से बुज़ुर्ग, महिलाएँ और बच्चें अब गंभीर बीमारियों के इलाज के लिये दूर-दूर तक नहीं जाना चाहेंगे क्योंकि उनसे जुड़ी सेवाएँ अब उनके नजदीक ही उपलब्ध होंगी।स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी राज्य सरकार की इस पहल की प्रशंसा की है, यह कहते हुए कि इससे न केवल स्वास्थ्य-संरचना सुदृढ़ होगी बल्कि स्वास्थ्य-साक्षरता, रोग-नियंत्रण और जीवन-प्रशासन की दिशा में भी सकारात्मक बदलाव आएँगे। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर इस तरह की परियोजनाएँ नियमित रूप से विकसित होती रहें, तो राज्य में स्वास्थ्य-indikators (जैसे मातृ-मृत्यु दर, शिशु-मृत्यु दर, रोग-नियंत्रण दर) और भी बेहतर होंगे।













