नई दिल्ली:– अक्सर देर से पहुंचने वाले लोगों को हम गैर-जिम्मेदार या लापरवाह मान लेते हैं, लेकिन न्यूरोसाइंस की मानें तो इसके पीछे ‘टाइम-ब्लाइंडनेस’ (Time-Blindness) जैसा गंभीर वैज्ञानिक कारण हो सकता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति का दिमाग समय की स्पीड और किसी काम में लगने वाले समय का सही आकलन करने में विफल रहता है।
क्या कहती है रिसर्च?
येल यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया की स्टडीज के अनुसार, अटेंशन डेफिसिट हाइपर एक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) से ग्रस्त 70-80% लोग समय के मैनेजमेंट में गंभीर चूक करते हैं। ऐसे लोग किसी काम में लगने वाले वास्तविक समय को अक्सर 30 से 40% कम आंकते हैं। उनके लिए समय एक सीधी रेखा न होकर बिखरे हुए टुकड़ों जैसा होता है, जिससे डेडलाइन और अलार्म का असर कम हो जाता है।












