नई दिल्ली:– ब्रेन स्ट्रोक एडल्ट्स में शारीरिक अक्षमता का एक प्रमुख कारण है। यह तब होता है जब दिमाग तक खून की आपूर्ति बाधित होती है या दिमाग की कोई नस फट जाती है, जिससे ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। समय पर इसके लक्षणों को पहचानना और जोखिम कारकों को कंट्रोल करना ही इससे बचने का एकमात्र प्रभावी रास्ता है।
ब्रेन स्ट्रोक के प्रमुख लक्षण
चेहरे, हाथ या पैरों में अचानक सुन्नपन या कमजोरी।
बोलने में कठिनाई, शब्दों का लड़खड़ाना या भ्रम की स्थिति।
देखने में धुंधलापन या शरीर का संतुलन बिगड़ना।
बिना किसी स्पष्ट कारण के सिर में असहनीय तेज दर्द।
ऐसे कम करें ब्रेन स्ट्रोक का जोखिम
हाई ब्लड प्रेशर- यह स्ट्रोक का सबसे बड़ा दुश्मन है। बुजुर्गों में यह खतरा चार गुना तक बढ़ जाता है। इसलिए इसे कंट्रोल करने के लिए डॉक्टर की सलाह लें।
धूम्रपान- यह दिमाग में ब्लॉकेज के खतरे को दोगुना और हेमरेज के खतरे को चार गुना बढ़ा देता है।
हृदय रोग- अनियमित धड़कन या कोरोनरी आर्टरी डिजीज ब्लड क्लॉट बनाकर ब्रेन स्ट्रोक का कारण बन सकती है। ऐसे में हार्ट हेल्थ का ख्याल रखना और डॉक्टर से रेगुलर चेकअप जरूरी है।
डायबिटीज- शुगर लेवल बढ़ने से रक्त धमनियों (Blood Vessels) को नुकसान पहुंचता है, जो स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ाता है।
कोलेस्ट्रॉल का असंतुलन शरीर में ‘बेड कोलेस्ट्रॉल’ (LDL) की अधिकता धमनियों को सिकोड़ देती है, जिससे रक्त प्रवाह बाधित होता है।
एक्टिव न रहना- मोटापा और व्यायाम की कमी स्ट्रोक के खतरे को तीन गुना बढ़ा सकती है।
खतरे के इन कारणों को टालना है मुश्किल
उम्र
जेंडर
फैमिली हिस्ट्री













