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सवाल से बवाल अपने ही ‘चक्रव्यूह’ में फंसे मोदी-शाह UGC के मुद्दे पर BJP होगी तबाह आडवाणी की तरह काट खोज पाएंगे ‘चाणक्य…

NBTV24 by NBTV24
January 31, 2026
in सामान्य
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सवाल से बवाल अपने ही ‘चक्रव्यूह’ में फंसे मोदी-शाह UGC के मुद्दे पर BJP होगी तबाह आडवाणी की तरह काट खोज पाएंगे ‘चाणक्य…
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नई दिल्ली:–:उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने नियम जारी किए। जिसको लेकर समूचे देश में बवाल मच गया। तकरीबन दो हफ्ते चले विरोध के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा जहां इस पर फिलहाल के लिए रोक लगा दी गई। लेकिन यह कदम भारतीय जनता पार्टी के लिए आने वाले परेशानी बढ़ाने वाला साबित हो सकता है।

दरअसल, केंद्र सरकार के अंतर्गत आने वाले यूजीसी ने 13 जनवरी 2026 को नए नियम जारी किए थे। इन नियमों को ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस 2026’ दिया गया। नियमों के तहत उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए ‘इक्विटी कमिटी’ बनाने का प्रावधान रखा। लेकिन नियमों में भेदभाव की परिभाषा सिर्फ एससी-एसटी और ओबीसी तक सीमित कर दी गई।।
UGC नियमों पर बवाल और सवाल
यूजीसी के नए नियमों में सामान्य वर्ग के छात्रों को इसमें सुरक्षा नहीं दी गई थी। जिसके चलते यूजीसी के नए नियमों को लेकर विवाद हो गया था। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुई याचिकाओं में कहा गया कि ये नियम भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं और सामान्य वर्ग के लोगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। सर्वोच्च अदालत ने भी माना कि ऐसे नियम समाज को बांट सकते हैं और शिक्षा में एकता की बजाय अलगाव पैदा कर सकते हैं।

बीजेपी के लिए असली चुनौती क्यों?
मामले की सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कई कड़ी टिप्पणियां की। इसके साथ ही यूजीसी और केन्द्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए इन नियमों पर रोक लगा दी। इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होनी है उससे पहले सरकार को जवाब देना होगा। यही केन्द्र की बीजेपी सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित होने वाली है।

आम तौर पर जनरल कैटेगरी को उत्तर भारत के राज्यों में बीजेपी का मुख्य वोटर बेस माना जाता है। यूजीसी मुद्दे पर इस कथित वोट बैंक का गुस्सा पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। खास बात यह है कि जनरल कैटेगरी के कई निचले स्तर के बीजेपी नेताओं ने भी पार्टी हाई कमान को चिट्ठी लिखकर अपना विरोध जताया है।

झेलनी पड़ेगी सवर्णों की नाराजगी!
बीजेपी के अंदर ही यह माना जा रहा था कि ये नियम पार्टी को नुकसान पहुंचा सकते हैं। बातचीत में नाम न लिखने की शर्त पर एक बीजेपी नेता ने कहा हमारे लिए अपने समर्थकों को यह समझाना मुश्किल हो रहा है और अगर हम विरोध नहीं करते हैं तो हमारे समर्थक हमसे सवाल करेंगे हो सकता है हमसे किनारा भी कर लें।

छिटकेंगे SC-ST और OBC वोटर!
भारतीय जनता पार्टी भी इस बात को लेकर चिंतित है कि उसे अभी भी सुप्रीम कोर्ट को जवाब देना है। अगर सरकार कोर्ट में इन यूजीसी नियमों का बचाव करती है तो नतीजा चाहे जो भी हो सामान्य वर्ग पार्टी के विरुद्ध हो सकता है। यदि वह नियमों का विरोध नहीं करती है, तो एससी-एसटी और ओबीसी वोटर छिटक सकते हैं।
1989 में भी बना था ऐसा ही माहौल
इससे पहले जब 1989 में विश्ननाथ प्रताप सिंह की सरकार ने मंडल कमीशन की सिफारिशों को लागू किया था। तब भाजपा इस सरकार का हिस्सा थी। उस वक्त भी कुछ ऐसी ही स्थिति बनी थी। लेकिन तब उसने ‘मंडल’ की काट ‘कमंडल’ के तौर पर निकाल ली थी। लाल कृष्ण आडवाणी ने राम मंदिर रथ यात्रा निकालते हुए जाति की बजाय हिंदुओं को एकजुट करने का प्रयास किया था। जिसकी बदौलत बीजेपी का ग्राफ लगातार बढ़ता गया और वह सत्ता के शीर्ष तक पहुंच गई थी।

2014 से सबको साध रही भाजपा!
साल 2004 से 2014 तक यानी 10 साल भाजपा सत्ता से दूर रही, लेकिन दोबारा सत्ता में लौटते ही पार्टी ने सबको साधना शुरू कर दिया। सवर्ण उसका कोर वोटर था ही, साथ में उसने एससी-एसटी और कुछ फीसद ओबीसी को भी अपने पाले में खींच लिया। इसके पीछे उसके कई फैसले मददगार साबित हुए।

अब सरकार का रुख क्या होगा?
साल 2018 में जब सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी कानूनों में कुछ संशोधनों का सुझाव दिया था, तब इन समुदायों ने काफी विरोध किया था। नतीजतन, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की सिफारिशों के विपरीत एससी-एसटी कानूनों को और मजबूत किया। सवाल यह है कि अगर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एससी-एसटी समुदायों द्वारा फिर से इसी तरह की मांगें उठाई जाती हैं तो सरकार का रुख क्या होगा?

इसके अलावा अगर सरकार जनरल कैटेगरी की मांगों पर ध्यान नहीं देती है और इन नियमों में संशोधन नहीं किया जाता है तो भाजपा को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। यही वजह है कि सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि 1989 में ‘मंडल’ का जवाब ‘कमंडल’ से देने वाली बीजेपी इस बार अपने ही बुने जाल को कैसे काटती है।

Tags: Hindi newsIndiaToday latest newsToday newsछत्तीसगढ़नई दिल्ली
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