नई दिल्ली:– नेशनल कृमि मुक्ति दिवस हर साल 10 फरवरी को भारत में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य बच्चों और किशोरों को कृमि संक्रमण यानी वर्म इंफेक्शन से बचाने और इसके प्रति जागरूकता फैलाना है।
जानकारों का मानना है कि, कृमि संक्रमण बच्चों की सेहत, पोषण और शारीरिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इससे कमजोरी, एनीमिया, पेट दर्द और पढ़ाई में ध्यान की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में आज राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर आइए जानते है इससे जुड़ी महत्वपूर्ण बातें-
राष्ट्रीय कृमिनाशक दिवस की शुरुआत कैसे हुई?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, भारत में पहली बार 10 फरवरी 2015 को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया गया। भारत में बड़ी संख्या में बच्चे आंतों के परजीवी कृमियों (मृदा-जनित हेलमिंथ) के खतरे में थे। ये संक्रमण तुरंत गंभीर रूप में दिखाई नहीं देते, लेकिन लंबे समय में बच्चों के पोषण, शारीरिक विकास, मानसिक क्षमता और पढ़ाई पर नकारात्मक असर डालते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्टों और राष्ट्रीय स्वास्थ्य आंकड़ों ने यह संकेत दिया कि करोड़ों बच्चों को नियमित कृमिनाशक उपचार की आवश्यकता है। इसी आवश्यकता को देखते हुए भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक संगठित राष्ट्रीय अभियान शुरू करने का निर्णय लिया।
पहली बार 10 फरवरी 2015 को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया गया। इसके तहत स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को कृमिनाशक दवा दी जाने लगी, ताकि बिना लक्षण वाले बच्चों का भी समय पर उपचार हो सके और संक्रमण की श्रृंखला को रोका जा सके।
इस प्रकार यह पहल बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और समग्र विकास के उद्देश्य से शुरू की गई।
राष्ट्रीय कृमिनाशक दिवस 2026 का विषय
राष्ट्रीय कृमिनाशक दिवस 2026 का विषय अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ है। विषय प्रकाशित होते ही इसे राष्ट्रीय कृमिनाशक दिवस 2026 के विषय पृष्ठ पर अपडेट कर दिया जाएगा।
राष्ट्रीय कृमिनाशक दिवस मनाने 2026 का क्या है महत्व
कृमिनाशक उपचार विभिन्न कार्यक्रमों का एक हिस्सा है, लेकिन 2015 में, कृमिनाशक उपचार के लिए एक अलग कार्यक्रम स्थापित किया गया जिसे राष्ट्रीय कृमिनाशक दिवस कहा जाता है।
पेट के कीड़े न केवल बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं, बल्कि इसके परिणामस्वरूप बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित होती है। इन समस्याओं से पीड़ित बच्चे अक्सर कम वजन के होते हैं और उनका विकास रुका हुआ होता है।
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पूरे देश के लोगों का ध्यान कृमि संक्रमण के खतरे की ओर आकर्षित करता है और उनसे कृमि संक्रमण के पूर्ण उन्मूलन में अपना योगदान देने का आग्रह करता है।













